भीलवाड़ा 26 मार्च / लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 तथा बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 से जुड़ी विशेष न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश बाल कृष्ण मिश्र ने सोमवार को अपना एक अहम निर्णय सुनाते हुए पोक्सो एक्ट के आरोपी को दोष मुक्त किया है ।
न्यायिक सूत्रों के अनुसार 10 जून 2024 को एक नाबालिक पीड़िता का अपहरण कर दुष्कर्म करने का मामला थाना कराई भीलवाड़ा में अपराध अंतर्गत धारा 137 (2) व 96 बीएनएस के तहत दर्ज किया गया जिसमें जांच अधिकारी ने अनुसंधान कर 1 मार्च 2025 को आरोप पत्र दाखिल कर आरोपी घीसू लाल उर्फ बबलू पुत्र बकसू बैरवा उम्र 21 को गिरफ्तार किया था ।
विशेष न्यायालय ने प्रकरण की त्वरित सुनवाई कर गत 23 मार्च सोमवार को अपना निर्णय सुनाते हुए नाबालिक पीड़िता की उम्र को प्रमाणित नहीं माना और प्रस्तुत दस्तावेजों एवं बयानों से पाया कि पीड़िता अभियुक्त के साथ चार-पांच महीने स्वेच्छा से साथ रही और इस बीच आपसी सहमति से शारीरिक संबंध स्थापित किये जाने से अभियुक्त को बलात्कार के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता इस मामले में पीड़िता का नाबालिग होना अभियोजन पक्ष साक्ष्य से सिद्ध नहीं कर पाया इसलिए अदालत ने अभियुक्त का यह कृत्य लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 3/4 (2) व 5(एल) 6 के तहत आवेष्ठित नहीं होता है।
इसलिए अदालत ने अपने निर्णय में अभियुक्त घीसू लाल को दोष मुक्त किया और पीड़िता को पुनर्वास हेतु दिलाया जाने वाले प्रतिकार की स्थिति प्रकट नहीं होने से पीड़िता के संबंध में प्रतिकार की राशि के अवधारणा की मांग को भी खारिज कर दिया है ।
अभियुक्त की ओर से दमदार पैरवी अधिवक्ता मंजूर मोहम्मद नीलगर एवं फारूक अहमद डायर ने की जिसमे विशेष सहयोगी उमर मोहम्मद नीलगर रहे तथा पीड़ित पक्ष के लिए राज्य की ओर से विद्वान विशेष लोक अभियोजक धर्मवीर सिंह कानावत ने अपना पक्ष रखा।
