स्मार्ट हलचल|एक प्रेस विज्ञप्ति में वरिष्ठ समाजसेवी अरुण भार्गव ने बताया कि राजस्थान का जो बजट पेश हुआ है वह वृद्ध जनों के लिए कुठारा घात है पूरे राजस्थान में वृद्ध जनों की संख्या बढ़ रही है लेकिन बजट में उनके बारे में कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया।भार्गव ने बताया कि उपभोक्ता भंडारों की हालत यह है की डॉक्टर का पर्चा लेकर जाओ दवाई अगर 5000 रुपए से ऊपर की हो तो वह नहीं मिलती है बिल 5000 से काम का ही बनाते हैं बाकी की दवाई पेंशनर को जेब से लेनी पड़ती है कई दवाइयां उपलब्ध भी नहीं होती बताया जाता है कि 800 करोड़ से अधिक रुपया सरकार के द्वारा नहीं दिया गया आरजीएस से संबंधित मेडिकल स्टोर में पेंशनर वृद्ध जनों को बिना दवाई के ही खाली हाथ लौटा देते हैं।
इस बजट में वृद्धो के लिए वृद्ध आश्रम या कोई और ऐसी व्यवस्था नहीं की गई जो वृद्ध जनों के हित में हो राज्य सरकार को इसमें पुनः विचार करके आरजीएचएस की जितनी दवाई डॉक्टर लिखें उतनी ही दवाई बीमार मरीज को उपलब्ध हो ऐसी व्यवस्था सरकार द्वारा होनी चाहिए।
वृद्ध आदमी बहुत परेशानी से घर से आते हैं ऑटो का आने जाने का पैसा लगता है और खाली हाथ लौटना पड़ता है।
