बौद्ध भीम कथा में गूंजा बाबा साहेब के संघर्ष का प्रसंग, पिता के निधन की कथा सुन भावुक हुए श्रद्धालु

कथा वाचिका प्रेमा अम्बेडकर ने सुनाई रामजी मालोजी सकपाल के त्याग और अनुशासन की गाथा, बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

जसवंतनगर (इटावा) स्मार्ट हलचल|क्षेत्र के ग्राम जैनपुर नागर में आयोजित तीन दिवसीय “बौद्ध भीम कथा” के तीसरे दिन का कार्यक्रम अत्यंत भावुक माहौल में संपन्न हुआ। कथा वाचिका प्रेमा अम्बेडकर ने जब भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर के पिता रामजी मालोजी सकपाल के निधन से जुड़ी मार्मिक घटना का वर्णन किया, तो पूरा पंडाल भावनाओं से भर उठा। कथा सुनते ही श्रद्धालुओं के बीच गहरा सन्नाटा छा गया और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
कथा वाचन के दौरान प्रेमा अम्बेडकर ने बताया कि बाबा साहेब के पिता रामजी सकपाल अत्यंत अनुशासित और दूरदर्शी व्यक्ति थे। उस समय समाज में व्याप्त भेदभाव और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने पुत्र को उच्च शिक्षा दिलाने का दृढ़ संकल्प लिया था। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने बेटे की पढ़ाई और संस्कारों पर विशेष ध्यान दिया।
कथा वाचिका ने कहा कि जब रामजी सकपाल का निधन हुआ, तो यह बाबा साहेब के जीवन के सबसे दुखद क्षणों में से एक था। पिता की मृत्यु ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने अपने पिता के सपनों को पूरा करने का संकल्प और अधिक मजबूत कर लिया। यही संकल्प आगे चलकर उन्हें समाज के दबे-कुचले लोगों की आवाज बनने की प्रेरणा देता रहा।
जैसे ही कथा में पिता के निधन का प्रसंग आया, पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे। कई लोग बाबा साहेब के संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए अपने आंसू नहीं रोक सके। कथा के माध्यम से बाबा साहेब के जीवन संघर्ष, शिक्षा के महत्व और सामाजिक न्याय के संदेश को भी विस्तार से बताया गया।
कार्यक्रम के तीसरे दिन भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। श्रद्धालुओं ने कथा वाचिका प्रेमा अम्बेडकर का सम्मान करते हुए उन्हें नोटों की माला पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान दिनेश कुमार उर्फ लाखन सिंह (जैनपुर नागर), रामगोपाल (नाकऊ) सहित अन्य सात लोगों ने भी उनका अभिनंदन किया।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय पुलिस प्रशासन की भी उपस्थिति रही। प्रभारी निरीक्षक कमल भाटी, उपनिरीक्षक शुभम वर्मा, उपनिरीक्षक महेन्द्र सिंह, कांस्टेबल संजय सिंह तथा आलोक वर्मा कथा में मौजूद रहे। वहीं सुशील कांत ने सभी अतिथियों और पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर अर्जुन सिंह, हुकुम सिंह, भीम प्रकाश, आनंदप्रिय गौतम, कैलाश बाबू, राजेंद्र सिंह, भारत सिंह, अकल सिंह, चन्द्र प्रकाश, रंजीत बाबू, अशोक कुमार, ध्रुव सिंह (एडवोकेट), रमेश कुमार (डीलर), तिलक सिंह, रमाकांत, सुशील कान्त (पत्रकार), सत्येंद्र सिंह (मास्टर), सतीश बाबू, सचिन, मातादीन, महेश, मायाराम, गंगादीन सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु मौजूद रहे।