20 साल बाद पूरी हुई मनोकामना: रामकन्या देवी ने ठाकुरजी को दामाद बनाकर रचाया तुलसी विवाह

कोटड़ी । आस्था, श्रद्धा और भावनाओं से जुड़ा एक अनूठा आयोजन गुरुवार को ककरोलिया घाटी में देखने को मिला, जहां बड़े चारभुजानाथ मंदिर से ठाकुरजी गाजे-बाजे के साथ रथ में सवार होकर तुलसी विवाह के लिए पहुंचे।इस विशेष आयोजन की आयोजक रामकन्या देवी सुथार रहीं, जिनकी जीवन कहानी इस आयोजन को और भी भावुक बना देती है। करीब 20 वर्ष पूर्व उनके पति का निधन हो गया था और उनकी कोई संतान भी नहीं है। ऐसे में उन्होंने वर्षों से ठाकुरजी को अपना दामाद बनाने की मनोकामना संजो रखी थी।गुरुवार को उनकी यह वर्षों पुरानी इच्छा साकार हुई, जब ककरोलिया घाटी स्थित बड़े चारभुजानाथ मंदिर से ठाकुरजी पूरे विधि-विधान और धूमधाम के साथ रथ में सवार होकर विवाह स्थल पर पहुंचे। गाजे-बाजे, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।इस दौरान बारात में सवाईराम जाट, लादूलाल सेन, मंदरूफ़ रायका,सीताराम कुम्हार, भवँर सुथार ,भेरू लाल जाट, ओम प्रकाश दास, पुजारी संजय वैष्णव, दिनेश वैष्णव, सुमित्रा जाट, मांगी वैष्णव, फुला जाट सहित पूरे गांव के लोग शामिल हुए। वहीं बारात के स्वागत में लादूलाल सुथार, गोपाल सुथार, भेरू लाल सुथार, देवेंद्र सुथार और देवकिशन सुथार सहित ग्रामीणों ने गर्मजोशी से अगवानी की।तुलसी विवाह की रस्में पूरे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुईं, जहां रामकन्या देवी ने पूरे हर्षोल्लास के साथ इस आयोजन को सम्पन्न कराया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि एक महिला की वर्षों पुरानी भावनात्मक इच्छा के पूर्ण होने का भी साक्षी रहा।