मदन मोहन गर्ग
गंगापुर सिटी, स्मार्ट हलचल।जैसलमेर में वरिष्ठ पत्रकार के साथ कथित प्रशासनिक अत्याचार और मनमानी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (आईएफडब्ल्यूजे) राजस्थान की ओर से गंगापुर सिटी में उपखंड अध्यक्ष महेश शर्मा एवं महासचिव मदन मोहन गर्ग के नेतृत्व में पत्रकारों ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन के दौरान मदन मोहन शर्मा, राधामोहन अग्रवाल,उत्तम, बनी सिंह आदि मौजूद रहे।
ज्ञापन में बताया गया कि जैसलमेर में लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र सिंह राठौड़ के साथ प्रशासनिक स्तर पर कथित रूप से दुर्भावनापूर्ण एवं दमनात्मक कार्रवाई की गई, जो न केवल पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी विपरीत है।
बताया गया कि राठौड़ पिछले करीब 22 वर्षों से विधिवत अनुमति के आधार पर ‘डेजर्ट’ क्षेत्र के समीप अपना रेस्टोरेंट संचालित कर रहे थे और नियमित रूप से सभी देय करों का भुगतान करते आ रहे थे। बावजूद इसके, वर्ष 2025 में बिना किसी स्पष्ट लिखित आदेश के मौखिक रूप से मात्र तीन दिनों में रेस्टोरेंट खाली करने के निर्देश दे दिए गए।
ज्ञापन में आरोप है कि न्यायालय से स्थगन आदेश मिलने के बावजूद प्रशासन द्वारा लगातार प्रताड़नात्मक कार्रवाई जारी रखी गई। इसमें गैस सिलेंडर जब्त करना, किचन सील करना और लाइसेंस नवीनीकरण रोकना जैसी कार्रवाइयां शामिल हैं। वहीं 18 फरवरी को रेस्टोरेंट बंद होने के बाद भी 17 मार्च को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों से दीवार तोड़कर पूरे रेस्टोरेंट को ध्वस्त कर दिया गया, जिससे करीब सवा करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
आईएफडब्ल्यूजे ने इस कार्रवाई को न केवल न्यायालय की भावना के विपरीत बताया, बल्कि इसे एक स्थापित व्यवसाय को नुकसान पहुंचाने और पत्रकार की आवाज दबाने का प्रयास भी बताया है। संगठन का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।
इस मामले के विरोध में 29 मार्च को जयपुर में सैकड़ों पत्रकारों ने एकत्रित होकर राज्य सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया और मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा। समय नहीं मिलने पर पत्रकारों ने धरना देने का निर्णय लिया, जो पिछले कई दिनों से जारी है।
संगठन ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि लोकतंत्र में पत्रकारों की स्वतंत्रता सुरक्षित रह सके।
