मॉरीशस में भारत-समर्थित 11 प्रोजेक्ट्स का हुआ उद्घाटन

शाश्वत तिवारी

पोर्ट लुइस। स्मार्ट हलचल|मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुइस में आयोजित 9वें हिंद महासागर सम्मेलन में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भाग लिया और मुख्य भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने अन्य प्रतिभागी देशों के विदेश मंत्रियों एवं प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय चर्चा भी की। यह दौरा भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति, विजन महासागर और वैश्विक दक्षिण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
डॉ. जयशंकर ने मॉरीशस के राष्ट्रपति धरमबीर गोखूल से मुलाकात की और दोनों देशों की साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर चर्चा की। इससे पहले 9 अप्रैल को पोर्ट लुइस पहुंचे डॉ. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम के साथ दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने को लेकर चर्चा की। साथ ही दोनों के बीच पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों और उनके प्रभावों पर भी बात हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने विकास सहयोग, स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता निर्माण, मोबिलिटी, प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों पर भी विचार साझा किए।
डॉ. जयशंकर ने भारत-समर्थित 11 उच्च प्रभाव वाले सामुदायिक विकास परियोजनाओं (एचआईसीडीपी) का उद्घाटन किया और कहा कि ये परियोजनाएं भारत की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं, जिसके तहत हम अपने विकास सहयोग को हर मॉरीशसवासी के द्वार तक पहुंचाना चाहते हैं।
विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा विशेष आर्थिक पैकेज पर एलओई (आशय पत्र) का साक्षी बनने पर खुशी हुई, जो मॉरीशस के बुनियादी ढांचे के विकास, स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। किसी भागीदार देश के लिए अपनी तरह के पहले ‘आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल’ का शुभारंभ किया, जो विशेष रूप से मॉरीशस के सिविल सेवकों को समर्पित है। मुझे विश्वास है कि हमारी दीर्घकालिक क्षमता-निर्माण साझेदारी में यह मील का पत्थर सुशासन और जन-केंद्रित प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने पिछले एक वर्ष में भारत-मॉरीशस साझेदारी में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की सराहना की। डॉ. जयशंकर ने कहा कि उनकी चर्चा में समुद्री सहयोग, विकास साझेदारी, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित कई क्षेत्र शामिल थे। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की तीन प्रमुख विदेश नीति प्राथमिकताओं, ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति, विजन महासागर और वैश्विक दक्षिण के प्रति प्रतिबद्धता, में मॉरीशस का एक विशिष्ट स्थान है। उन्होंने मॉरीशस की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया। अपनी यात्रा के दूसरे चरण में विदेश मंत्री 11-12 अप्रैल को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जाएंगे, जहां वे यूएई के शीर्ष नेतृत्व से मिलकर दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग की समीक्षा करेंगे और ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और गहरा बनाने पर चर्चा करेंगे।