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टोंक में बनेठा थाना पुलिस पर संगीन आरोप : खाली ट्रैक्टर को ‘बजरी परिवहन’ बताकर मुकदमा-पुलिस चौथ वसूली का मामला आया सामने

शिवराज बारवाल मीना

टोंक/उनियारा। स्मार्ट हलचल| जिले के उनियारा सर्किल अन्तर्गत बनेठा थाना क्षेत्र में पुलिस की कथित अमानवीय कार्यशैली और झूठी कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जहां बनेठा थाना पुलिस पर अवैध वसूली और झूठी कार्यवाही के आरोपों ने बड़ा तूल पकड़ लिया है
जिला पुलिस अधीक्षक टोंक को दिए गए शिकायत रूपी ज्ञापन में ट्रैक्टर ट्राली मालिक परिवादी पक्ष ग्राम मीणों की झोपड़ियां निवासी छोटूलाल मीणा ने आरोप लगाते हुए बताया है कि बीते दिनों 5 फरवरी को उसका ट्रैक्टर-ट्रॉली पूरी तरह खाली होने के बावजूद भी पुलिस ने चौथ वसूली की पुरानी रंजिश के चलते “बजरी परिवहन” दर्शाकर अवैध बजरी परिवहन सहित राजकार्य में बाधा उत्पन्न करने का कथित रूप से झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया। शिकायतकर्ता का दावा है कि राजेश फिलिंग स्टेशन, अलीगढ़ रोड सूर्ज्याभेरू के पास पेट्रोल पम्प के सीसीटीवी फुटेज में ट्रैक्टर के साथ ट्रॉली खाली दिखाई दे रही है।
——- पुलिसकर्मियों के वर्चस्व के विवाद में ‘एंट्री’ नहीं दी तो थानाधिकारी ने दर्ज कर दिया मुकदमा ? ——–
टोंक एसपी को दी गई शिकायत में आरोप है कि थाना स्तर पर बजरी परिवहन के नाम पर प्रति ट्रैक्टर 1000 रूपये की कथित “एंट्री राशि” ली जाती रही है। आरोप है कि बीते दिनों 3 फरवरी को पुलिस वाहन चालक नरेन्द्र सिंह द्वारा पुरानी बकाया माह दिसम्बर 2025 व जनवरी 2026 कि 40,000 रूपये की नकद राशि परिवादी के घर से ली गई हैं। कथित तौर पर पुलिसकर्मियों में राशि के बंटवारे को लेकर विवाद के बाद 5 फरवरी को कार्रवाई की गई हैं। पुलिस द्वारा ट्रैक्टर का पीछा करने और गांव के पास छापर में भरे पानी के कीचड़ में फंसने के बाद टेप मशीन खोलकर ले जाने के बाद पुलिस ने मौके पर आकर दुबारा से भारी जाप्ते के साथ ट्रैक्टर ट्राली के जब्ती की बात भी शिकायत में कही गई है।
सीसीटीवी फुटेज बनाम एफआईआर : सच क्या है?
शिकायतकर्ता का कहना है कि डीजल भराने के दौरान पेट्रोल पंप के सीसीटीवी में ट्रॉली खाली नजर आ रही है। बजरी परिवहन का आरोप लगाकर जिस कच्चे, कीचड़युक्त रास्ते का उल्लेख पुलिस ने किया है, वहां बजरी से भरी ट्रॉली का निकलना संभव नहीं हैं। जब्ती मेमो में स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी संदिग्ध है। इतना ही नहीं पुलिस द्वारा कथित घटनास्थल पर ई-साक्ष्य भी नहीं बनाए गए हैं। अब इन दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ट्रॉली खाली थी तो बजरी परिवहन का मामला किस आधार पर दर्ज हुआ?
——- उच्चाधिकारियों तक पहुंची शिकायत ——–
मामले की शिकायत जिला पुलिस अधीक्षक टोंक सहित मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस मुख्यालय जयपुर, लोकायुक्त सचिवालय, एसीबी, मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जनजाति आयोग तक भेजी गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस कॉल डिटेल, व्हाट्सएप चैट और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की शासन प्रशासन से मांग की है। साथ ही स्वतंत्र जांच (एसआईटी/सीबी/सीआईडी) की भी मांग उठी है।
——- प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्न ——-
* क्या थाना स्तर पर संगठित अवैध वसूली तंत्र संचालित है?
* क्या झूठे मुकदमे दबाव बनाने का माध्यम बन रहे हैं?
* क्या उच्चाधिकारी गोपनीय जांच करवाएंगे?
* यदि ट्रॉली खाली थी तो बजरी परिवहन का मुकदमा किस आधार पर दर्ज हुआ?
– क्या सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जाएगा?
– क्या कथित ‘एंट्री’ वसूली के आरोपों पर उच्चस्तरीय जांच बैठेगी?
– जिला स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया क्या है?
– ‘पुलिस का जवाब आएगा तो सच सामने आएगा’
यदि शिकायत की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला पुलिस प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। इस मामले में पुलिस से प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन मामले में थाना बनेठा और संबंधित अधिकारियों से प्रतिक्रिया के लिए संपर्क किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई स्पष्ट या औपचारिक जवाब प्राप्त नहीं हुआ। जिला पुलिस अधीक्षक, टोंक से भी पक्ष जानने का प्रयास किया गया, परंतु पुलिस पर आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अपेक्षित स्पष्टता सामने नहीं आई। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस विभाग आधिकारिक प्रतिक्रिया कब देता है और क्या स्वतंत्र जांच की घोषणा होती है।
फिलहाल, यह मामला आरोप बनाम चुप्पी के बीच खड़ा है। प्रशासन की ओर से ठोस और पारदर्शी जवाब आने तक सवाल कायम रहेंगे।
——- पुलिस का क्या कहना है? ——-
पुलिस विभाग के अनुसार—
दिनांक 05 फरवरी 2026 को संबंधित ट्रैक्टर-ट्रॉली के विरूद्ध की गई कार्रवाई उपलब्ध तथ्यों और मौके की परिस्थितियों के आधार पर की गई। मुकदमा भी विधि सम्मत प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है। जब्ती और अन्य प्रक्रियाएं नियमानुसार संपन्न की गईं। कथित “एंट्री राशि” या अवैध वसूली के आरोप निराधार हैं। विभाग ने यह भी कहा है कि यदि किसी व्यक्ति के पास कोई ठोस साक्ष्य हैं तो वे सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें, जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। लेकिन दूसरी ओर चौथ वसूली के आरोपों और वाट्सएप चैटिंग ने पुलिस की पोल खोल कर रख दी हैं।
——- सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पर क्या? ——-
पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामले से संबंधित सभी उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण विवेचना के दौरान किया जाएगा। यदि सीसीटीवी फुटेज या अन्य डिजिटल सामग्री प्रस्तुत की जाती है तो उसे विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत जांच में शामिल किया जाएगा।
——— उच्चस्तरीय जांच पर संकेत ——–
जिला स्तर पर कहा गया है कि शिकायतें प्राप्त होने पर उनका परीक्षण किया जाता है और आवश्यकता होने पर उच्चाधिकारियों द्वारा जांच के आदेश भी दिए जा सकते हैं। फिलहाल प्रकरण विवेचनाधीन बताया गया है।
——- आरोप बनाम विभागीय स्पष्टीकरण ——-
जहां शिकायतकर्ता ने खाली ट्रॉली होने और कथित 40 हजार वसूली का दावा किया है, वहीं पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अब यह मामला जांच और साक्ष्यों के परीक्षण पर निर्भर करेगा।
—— आगे क्या? ——–
– क्या स्वतंत्र जांच के आदेश होंगे?
– क्या इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य निर्णायक भूमिका निभाएंगे?
– क्या विभागीय स्तर पर कोई आंतरिक समीक्षा होगी?
– इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट हो सकते हैं।
——- आरोपी पक्ष का जवाब ——-
वहीं, कथित रूप से झूठी कार्यवाही के आरोपी छोटूलाल मीणा और उसके कथित साथियों का कहना है कि —
उन्होंने किसी प्रकार की धमकी या अभद्र व्यवहार नहीं किया।
पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप “बचाव में गढ़ी गई कहानी” हैं।
ट्रैक्टर-ट्रॉली खाली थी और कार्रवाई रंजिशवश की गई।
छोटूलाल का दावा है कि यदि मौके के सीसीटीवी, मोबाइल लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच हो जाए तो वास्तविकता सामने आ जाएगी।
——– अब सवाल प्रशासन पर ——-
अब यह मामला “आरोप बनाम प्रत्यारोप” की स्थिति में पहुंच चुका है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि—
– क्या जिला स्तर पर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?
– क्या मौके के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित कर परीक्षण किए जाएंगे?
– क्या उच्चाधिकारी मामले की निगरानी करेंगे?
——– प्रकरण का निष्कर्ष ——-
बनेठा थाना बनाम छोटूलाल मीणा विवाद अब केवल एक मुकदमे का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस कार्यप्रणाली और नागरिक अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील विषय बन चुका है। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी इन परस्पर आरोपों की सच्चाई तक पहुंचने के लिए कितनी जल्द और कितनी पारदर्शी जांच करवाते हैं।
——- बनेठा विवाद : ‘ई-साक्ष्य क्यों नहीं?’-छोटूलाल का सवाल,पुलिस कार्रवाई पर उठे नए प्रश्न ——-
बनेठा थाना क्षेत्र के प्रकरण में अब विवाद और गहराता जा रहा है। पुलिस द्वारा 5 फरवरी को दर्ज मुकदमे में जहां आरोपी छोटूलाल मीणा व उसके साथियों पर अभद्र व्यवहार और पुलिस जीप में आग लगाने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है, वहीं आरोपी पक्ष ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
——– आरोपी पक्ष का नया सवाल : “ई-साक्ष्य क्यों नहीं बनाए?” ——-
छोटूलाल मीणा ने कहा कि यदि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह वैधानिक और तथ्यात्मक थी, तो मौके पर ई-साक्ष्य (डिजिटल फोटो/वीडियो रिकॉर्डिंग) क्यों नहीं तैयार किए गए? जब पुलिस का दावा है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली में बजरी भरी हुई थी, तो मौका स्थिति के स्पष्ट फोटो-वीडियो क्यों नहीं लिए गए? जब्ती प्रक्रिया के दौरान मौके का पंचनामा और दृश्य साक्ष्य सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा क्यों नहीं बनाए गए? छोटूलाल का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में पुलिस कार्रवाई के दौरान मौके की वीडियोग्राफी और फोटो साक्ष्य लेना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में साक्ष्य का अभाव संदेह उत्पन्न करता है।
——- निष्कर्ष ——-
बनेठा थाना बनाम छोटूलाल मीणा विवाद अब केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि पुलिस कार्यप्रणाली की पारदर्शिता पर उठे सवालों का विषय बन चुका है। अब देखना यह होगा कि जिला पुलिस प्रशासन इन सवालों का जवाब किस प्रकार देता है और वास्तविक जांच कब तक पूरी कर सच्चाई सार्वजनिक करता है।

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