एजाज़ अहमद उस्मानी
स्मार्ट हलचल|मेड़ता रोड क्षेत्र में रेलवे फाटक संख्या 101 पर रविवार रात एक बार फिर अव्यवस्था का बड़ा नज़ारा देखने को मिला। रात करीब 8:15 बजे रणथंभौर-जोधपुर इंटरसिटी ट्रेन के गुजरने के लिए रेलवे गेट बंद किया गया था, लेकिन ट्रेन के निकल जाने के बाद भी फाटक नहीं खुल सका। कारण था—रेलवे गेट का टूट जाना।
फाटक के लंबे समय तक बंद रहने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। खासकर नागौर जाने वाले मुख्य मार्ग पर भारी जाम की स्थिति बन गई, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह मार्ग दर्जनों गांवों को जोड़ता है, इसलिए स्थानीय लोगों, कामकाजी यात्रियों और आपातकालीन सेवाओं तक पर इसका सीधा असर पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन के निकलने के के बाद रेलवे कर्मचारियों ने फाटक को खोलने के लिए तुरंत प्रयास किया लेकिन टूटी फाटक नहीं खुली। अंत में रेल कर्मचारियों ने टीटी फाटक को हटाया। टूटी फाटक से कई लोग घंटों तक जाम में फंसे रहे, जिससे लोगों में रेलवे प्रशासन के प्रति आक्रोश देखने को मिला।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं यहां आम हो चुकी हैं। आए दिन रेलवे फाटकों पर तकनीकी खराबी या लापरवाही के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहा।
इस घटना ने एक बार फिर रेल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते फाटक की मरम्मत और उचित निगरानी की व्यवस्था होती, तो इस प्रकार की समस्या से बचा जा सकता था। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
