सघन निरीक्षण अभियान: यूरिया-डीएपी की जमाखोरी और दुरुपयोग पर कृषि विभाग सख्त,

– ऑफ सीजन में बढ़ी सख्ती, संदिग्ध बिक्री पर कार्रवाई शुरू-दो फर्मों के लाइसेंस निलंबित, 7 दिन में मांगा जवाब

शिवराज बारवाल मीना
टोंक।स्मार्ट हलचल|जिले में कृषि फसलों के ऑफ सीजन को देखते हुए कृषि विभाग ने यूरिया एवं डीएपी के अनावश्यक भंडारण और दुरुपयोग को रोकने के लिए सघन निरीक्षण अभियान शुरू कर दिया है।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने बताया कि विभागीय जांच में सामने आया है कि कुछ उर्वरक विक्रेता ऑफ सीजन के दौरान किसानों को आवश्यकता से अधिक उर्वरक बेच रहे हैं। इससे यूरिया के गैर-कृषि कार्यों में उपयोग और कालाबाजारी की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष जिले में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। जायद फसलों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्रति किसान अधिकतम 10 बैग यूरिया और 5 बैग डीएपी ही बेचने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग द्वारा किसानों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक स्टॉक न करें और जरूरत के अनुसार ही उर्वरक खरीदें।
*दो फर्मों पर कार्रवाई*
विभाग ने अनियमितताओं के चलते सुवालका एण्ड कम्पनी, भांसू (तहसील टोडारायसिंह)
क्रय-विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड, मालपुरा
के खुदरा उर्वरक लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं। संबंधित फर्मों को 7 दिन के भीतर आवश्यक दस्तावेजों सहित स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।
*हर स्तर पर निगरानी-सख्त कार्रवाई के निर्देश*
जिले में उर्वरक वितरण की कड़ी मॉनिटरिंग की जा रही है।सभी उर्वरक निरीक्षक विक्रेताओं के भौतिक स्टॉक और पॉस मशीन डेटा पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि कहीं भी जमाखोरी, डाइवर्जन या गैर-कृषि उपयोग के मामले सामने आते हैं, तो संबंधित के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण के साथ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।