संजय चौरसिया
स्मार्ट हलचल।हरनावदाशाहजी क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। कुत्तों के काटने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, जिससे आमजन में भय और आक्रोश का माहौल है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब चिकित्सा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है।
शनिवार सुबह दीगोद जागीर गांव में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 3 वर्षीय मासूम कुनाल पुत्र ईश्वर प्रजापति को कुत्ते ने पैर में काट लिया। हमले में बच्चे के पैर पर दांतों के गहरे निशान बन गए, जिससे परिवार में हड़कंप मच गया। परिजन बच्चे को तुरंत हरनावदाशाहजी के छीपाबड़ौद मार्ग स्थित राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। इंजेक्शन लेकर आ रही गाड़ी के इंतजार के बाद ही एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध हो पाया, जिसके बाद उपचार कर बच्चे को घर भेजा गया।
पहले भी सामने आ चुकी हैं गंभीर घटनाएं
गौरतलब है कि इससे एक सप्ताह पहले भी हरनावदाशाहजी कस्बे में एक पागल कुत्ते ने दो दिनों के भीतर दो बच्चों समेत पांच लोगों को काट लिया था। उस समय भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं होने के कारण घायलों को मजबूरी में झालावाड़ जिले के अकलेरा और जावर जाकर इंजेक्शन लगवाने पड़े थे।इसी तरह, शुक्रवार को कस्बे के चन्द मोहन रेगर को भी इंजेक्शन नहीं मिलने पर अकलेरा जाना पड़ा, जिससे स्थानीय चिकित्सा व्यवस्था की बड़ी पोल खुल गई।
प्रशासन हरकत में, औचक निरीक्षण के बाद पहुंची सप्लाई
लगातार बढ़ती शिकायतों और गंभीर हालात को देखते हुए अतिरिक्त जिला कलक्टर भंवरलाल जनागल ने शुक्रवार को हरनावदाशाहजी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एडीएम ने एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता और सप्लाई को लेकर अधिकारियों से जवाब-तलब किया और आवश्यक दवाइयों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बताया जा रहा है कि एडीएम के निरीक्षण के बाद शनिवार को लंबे समय बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित हो पाई है।
ग्रामीणों में आक्रोश, स्थायी समाधान की मांग
लगातार हो रही घटनाओं और लचर व्यवस्था से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों ने ग्राम पंचायत से आवारा कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी कराने और स्थायी समाधान की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता। अब बड़ा सवाल यह है कि यह व्यवस्था कितने दिनों तक कायम रह पाएगी?
