निंबाहेड़ा में कातिल रात ! मुकेश्यानंद महाराज की ‘दिव्य दृष्टि’ से खुला वार्डों का चक्रव्यूह

एक बेबाक राजनीतिक व्यंग्य # 6 — आकाश शर्मा

निंबाहेड़ा। स्मार्ट हलचल|नगर परिषद निकाय चुनाव के गरमाते माहौल में ‘मान-मनौव्वल’ और ‘भीतरी रणनीतियों’ को अमलीजामा पहनाने के लिए बस अब आज की रात बाकी है। और सच मानिए, राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि ‘आज की रात बहुत कुछ होने वाला है।’ यह बात जब हमें परम श्रद्धेय ‘मुकेश्यानंद महाराज’ ने बताई, तो हम भी हैरत में पड़ गए। आखिर इस आखिरी रात में ऐसा क्या होने वाला है ? हमारे ज़हन में सवालों का बवंडर उठने लगा। हमसे रहा नहीं गया और हमने बाबा जी पर प्रश्नों की बौछार कर दी । फिर क्या था! बाबा जी भी अपने पूरे रंग में आ गए। उन्होंने आँखें मूँदीं और प्रत्याशियों के सपनों में झाँकना शुरू कर दिया। अचानक बाबा जी चौंक कर बोले “अरे बेटा ! लोकतंत्र के इस पर्व में चुनाव जीतने के लिए लोग क्या-क्या जतन करते हैं! ज़रा देखो, जिस दुकान पर माल हफ़्तों से जमा पड़ा था, आज वो दुकान अचानक खाली कैसे हो ग ई?” हमने उत्सुकता से पूछा “महाराज, ये कौन सा तिलस्म है? और आपकी दिव्य दृष्टि किन-किन वार्डों पर पड़ रही है?” महाराज ध्यानमग्न होकर बोल “वत्स ! वार्ड नंबर 3, 4, 5, 7, 9, 10, 11, 19, 23, 24, 26, 29, 33, 40 और 44 में बड़ा दिलचस्प ‘खेल’ होने की सुगबुगाहट है। यह ‘अंतिम प्रहार’ की रात है, जहाँ चुनावी गोटियाँ रात के अंधेरे में बिछाई जा रही हैं।” हमने प्रतिप्रश्न किया “बाबा जी ! दोनों ही प्रमुख दल तो अपने-अपने विकास कार्यों के नाम पर वोट माँग रहे थे ?” बाबा बोले “दावे अपनी जगह हैं बेटा, लेकिन ज़मीनी हवा के एक झोंके ने दोनों ही खेमों को आईना दिखा दिया है। इसी घबराहट के कारण प्रत्याशी अब रात के इंतज़ार में बैठे हैं ।”
जनता भी मूड में ‘तू पूछ मत, और पूछेगा तो फँसेगा !’
दूसरी तरफ, इन वार्डों की आम जनता भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती। स्थिति यह है कि अगर कोई प्रत्याशी अति-उत्साह में किसी मोहल्ले या गली में जाकर अपनी स्थिति पूछ बैठता है, तो समझो वहीं फँस जाता है ! फिर शुरू होती है बयानों की ‘तोल-मोल’ नीति “अरे भाई साहब ! फलानी गली में तो इतने वोट उनके फिक्स हैं, और फलाने चौराहे पर आपके इतने कम पड़ रहे हैं…” और बस, इसी गुणा-भाग में प्रत्याशी का गणित गड़बड़ा जाता है और बातचीत लेन-देन व मान-मनौव्वल के मुकाम पर पहुँच जाती है।
प्रशासन की ‘तीसरी आँख’ भी अलर्ट
हालाँकि, इस पूरे माहौल पर केवल प्रत्याशियों और जनता की ही नज़र नहीं है। एक तरफ जहाँ रात के सन्नाटे में समीकरण साधने की कोशिशें तेज़ हैं, वहीं दूसरी ओर जिला निर्वाचन अधिकारी, पुलिस प्रशासन और फ्लाइंग स्क्वाड की टीमों ने भी पूरी कमर कस ली है। संवेदनशील वार्डों और संदिग्ध गतिविधियों पर प्रशासन की पैनी नज़र बनी हुई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आज की रात कौन से समीकरण बनते और बिगड़ते हैं, और जनता जनार्दन इस ‘अंतिम दाँव’ का क्या जवाब देती है!