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राष्ट्रीय वॉलीबॉल में अरनेड की बेटी लेखिका शर्मा की ऐतिहासिक उड़ान

बन्शीलाल धाकड़

स्मार्ट हलचल|बड़ीसादड़ी जब सपनों में विश्वास की आग धधकती हो, संकल्प पर्वत की तरह अटल हो और मेहनत जीवन का अभिन्न अंग बन जाए—तो गांव की कच्ची पगडंडियों से भी राष्ट्रीय पटल पर इतिहास रचा जाता है। डूंगला उपखंड के अरनेड़ गांव की होनहार बेटी लेखिका शर्मा ने राष्ट्रीय वॉलीबॉल के विशाल मंच पर ठीक यही सच्चाई सिद्ध कर दिखाई। यह केवल एक पदक की जीत नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की बेटियों के अथाह संघर्ष, दृढ़ इच्छाशक्ति और अपार संभावनाओं की जीवंत गाथा है। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय अरनेड़ की कक्षा दसवीं की मेधावी छात्रा लेखिका शर्मा, पिता किशन शर्मा (पुष्करना) की लाड़ली पुत्री है। बचपन से ही खेलों में रुचि रखने वाली लेखिका का चयन 69वीं राष्ट्रीय अंडर-14 विद्यालय छात्रा वॉलीबॉल प्रतियोगिता के लिए हुआ, जो आंध्रप्रदेश के कडापा में 5 से 9 जनवरी, 2026 तक आयोजित हुई थी। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में राजस्थान टीम ने दलाधीपति नेमीचंद कुमावत के नेतृत्व में, कोच हंसराज खोईवाल, टीम मैनेजर विमला देवी, ओम प्रकाश एवं महावीर के मार्गदर्शन में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल से ठीक पहले तमिलनाडु को सीधे सेटों में 3-0 से करारी शिकस्त देकर कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। यह उपलब्धि अंडर-14 वर्ष छात्रा वर्ग में राजस्थान के लिए मील का पत्थर साबित हुई, जो राज्य की खेल क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले गई

मैदान पर साकार हुए वर्षों के सपने

प्रतियोगिता के दौरान लेखिका का हर स्मैश उसके कठोर अभ्यास की अमिट कहानी बयां करता रहा, तो हर डिफेंस में आत्मविश्वास की चमक चारों ओर बिखरती नजर आई। यह पदक न केवल एक खेल विजय है, बल्कि सीमित संसाधनों वाली ग्रामीण बेटी की संघर्षपूर्ण यात्रा, अदम्य जिजीविषा और कभी न झुकने वाली भावना का प्रतीक है। उल्लेखनीय है कि यह लेखिका का दूसरा राष्ट्रीय चयन है—पहले नेशनल में भी उन्होंने राज्य का प्रतिनिधित्व किया था, जो उनके अनुशासन, लगन और निरंतर मेहनत का जीता-जागता प्रमाण है।

परिवार और गुरुओं का अटूट साथ

इस सफलता के पीछे पिता किशन शर्मा का मार्गदर्शन और त्याग सर्वोपरि रहा। स्वयं वॉलीबॉल के अनुभवी खिलाड़ी एवं अरनेड स्कूल में पंचायत शिक्षक के रूप में कार्यरत किशन शर्मा ने बेटी को बचपन से ही खेल की बारीकियां सिखाई। किशन लेखिका को सुबह 5 बजे से अभ्यास करवाता था, चाहे बारिश हो या धूप। गांव की कच्ची जमीन पर घंटों प्रैक्टिस से ही यह दिन आया। अरनेड स्कूल के शारीरिक शिक्षक हुकमीचंद मेनारिया ने बताया कि लेखिका प्रारंभ से ही अनुशासित, मेहनती और लक्ष्यप्रति समर्पित रही। सीमित सुविधाओं के बावजूद उसका दैनिक 4 घंटे का अभ्यास आज फल दे रहा। लेखिका की इस उपलब्धि पर पूरा विद्यालय और गांव गौरवान्वित है। ब्लॉक स्तर से राज्य स्तर तक की यात्रा में लेखिका ने कई जिला-स्तरीय टूर्नामेंट जीते, जो उनकी प्रगति की सीढ़ियां बने
क्षेत्र में खुशी की लहर, बधाईयों का सैलाब
लेखिका की इस ऐतिहासिक सफलता से अरनेड गांव सहित डूंगला उपखंड और पूरे चित्तौड़गढ़ जिले में हर्ष की लहर दौड़ गई। सहकारिता मंत्री गौतम दक ने कहा, “ऐसी बेटियां राजस्थान का गौरव हैं जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार दशोरा, राजेंद्र कुमार शर्मा, सीबीईओ रमेशचंद्र पुरोहित, प्रधानाचार्य शान्ति लाल लक्षकार, शारीरिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष चंद्रकांत शर्मा शिक्षक हीरालाल चंद्रावत, कुशल शर्मा, मदन शर्मा, ओंकार सिंह, नरेश पालीवाल, दिनेश सेन, ललित मेनारिया, सुरेश शर्मा, हरीश जोशी व रघुनाथ जाट सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद्, खेलप्रेमी और ग्रामीणों ने बधाई दी हैं। ग्रामीण बेटी लेखिका शर्मा ने सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा किसी महानगर की बंधी नहीं होती—वह तो गांव की मिट्टी में ही पनपती है। विश्वास है कि यह स्वर्णिम बेटी भविष्य में स्वर्ण पदक जीतकर राजस्थान का परचम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लहराएगी। उनकी कहानी अनगिनत ग्रामीण बेटियों के सपनों को पंख देगी, जो साबित करेगी कि मेहनत और विश्वास से असंभव कुछ नहीं।

स्मार्ट हलचल न्यूज़ पेपर 31 जनवरी 2025, Smart Halchal News Paper 31 January 2025
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