आस्था, संस्कृति और एकजुटता का संदेश देगा असू चेटीचंड महोत्सव,

शाहपुरा में आज निकलेगी झूलेलाल साहेब की भव्य शोभायात्रा
12 अक्टूबर सोमवार को दिनभर होंगे धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन, वाहन रैली, खेलकूद प्रतियोगिताएं, वरिष्ठजनों का सम्मान और बहराणा साहेब की अखंड ज्योति के दर्शन होंगे

शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल|सिंधी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक असू चेटीचंड महोत्सव सोमवार, 12 अक्टूबर को शाहपुरा में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पूज्य सिंधी पंचायत शाहपुरा के तत्वावधान में आराध्य भगवान झूलेलाल साहेब की स्तुति में आयोजित होने वाले इस महोत्सव में धर्म, संस्कृति, सेवा, सम्मान और युवा सहभागिता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। दिनभर चलने वाले कार्यक्रमों में झंडारोहण, वाहन रैली, सामूहिक भोजन प्रसादी, खेलकूद प्रतियोगिताएं, वरिष्ठजनों का सम्मान, भजन-कीर्तन, छेज और पूज्य बहराणा साहेब की अखंड ज्योति की शोभायात्रा प्रमुख आकर्षण रहेंगे।
पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष लीलाराम वासवानी ने बताया कि महोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। दिलखुशाल बाग स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में सजावट की गई है। धार्मिक कार्यक्रम में पं. सुनील भट्ट की मंडली भजन-कीर्तन की प्रस्तुतियां देगी। आयोजकों ने समाज के सभी लोगों से महोत्सव में पूरे दिन सहभागी बनने और अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन में शामिल होने का आह्वान किया है।

भगवान झूलेलाल की आराधना से होगा शुभारंभ-
महोत्सव का आगाज सुबह 9 बजे दिलखुशाल बाग स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में झंडारोहण समारोह के साथ होगा। इसके बाद सुबह 9.30 बजे सिंधी समाज की वाहन रैली निकाली जाएगी। रैली झूलेलाल मंदिर से रवाना होकर बालाजी की छतरी, सदर बाजार, कुंडगेट, त्रिमूर्ति स्मारक, सिंधी कॉलोनी, पोस्ट ऑफिस भीलवाड़ा रोड और बस स्टैंड होते हुए पिवणिया तालाब के पास स्थित संत कंवर राम धर्मशाला पहुंचेगी। रैली के समापन के बाद धर्मशाला में भोजन प्रसादी की व्यवस्था रहेगी। दोपहर 12.30 बजे पिवणिया तालाब की पाल पर खेलकूद प्रतियोगिताएं शुरू होंगी, जो अपराह्न 3.30 बजे तक चलेंगी। प्रतियोगिताओं के लिए पंजीयन किया जा चुका है और निर्णायकों की नियुक्ति भी की गई है।

वरिष्ठजनों का सम्मान, नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने की पहल-
महोत्सव के तहत शाम 4.55 बजे दिलखुशाल बाग स्थित झूलेलाल मंदिर में सिंधी समाज के वरिष्ठ महिला एवं पुरुष सदस्यों का पूज्य सिंधी पंचायत की ओर से सम्मान किया जाएगा। इस दौरान समाज के लोग वरिष्ठजनों से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। यह आयोजन समाज में बुजुर्गों के अनुभव, योगदान और संस्कारों के महत्व को रेखांकित करेगा। सिंधी समाज की परंपरा में वरिष्ठजनों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिवार और समाज की सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के संघर्ष, सामाजिक योगदान और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भजन-कीर्तन, छेज और बहराणा साहेब की आराधना-
शाम 5 बजे झूलेलाल मंदिर में भजन-कीर्तन, छेज और पूज्य बहराणा साहेब का धार्मिक कार्यक्रम प्रारंभ होगा। पं. सुनील भट्ट की मंडली भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां देगी। सिंधी समाज की पारंपरिक छेज में सामूहिक लय और ताल के साथ नृत्य किया जाता है। यह लोकपरंपरा धार्मिक उल्लास के साथ सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान को भी अभिव्यक्त करती है। शाम 6.30 बजे झूलेलाल मंदिर से पूज्य बहराणा साहेब और अखंड ज्योति की शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा बालाजी की छतरी, सदर बाजार और कुंडगेट होते हुए पिवणिया तालाब के पास स्थित संत कंवर राम धर्मशाला पहुंचेगी। मार्ग में श्रद्धालु भगवान झूलेलाल के जयकारों के साथ धार्मिक आस्था प्रकट करेंगे। रात्रि 8 बजे धर्मशाला परिसर में आम भंडारे का आयोजन होगा। इसके बाद रात 10 बजे तक डांडिया और संगीत-नृत्य का कार्यक्रम चलेगा।
पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष लीलाराम वासवानी, महासचिव नरेश लखपतानी और कोषाध्यक्ष अशोक थानवानी सहित नवयुवक मंडल एवं झूलेलाल महिला मंडल के कार्यकर्ता आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं। आयोजकों ने समाज के सभी परिवारों से आग्रह किया है कि वे अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर पूरे दिन महोत्सव में भाग लें और धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का परिचय दें।