-ः प्लास्टर ऑफ पेरिस नहीं, मिट्टी के गणेश जी स्थापना का लिया संकल्प:-
कोटा 12 अगस्त। स्मार्ट हलचल।सुवि आई हॉस्पिटल के निदेशक, प्रख्यात नेत्र शल्य चिकित्सक, लेखक और प्रेरक वक्ता डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय का 57वां जन्मदिवस एक अनूठे और प्रेरणादायक रूप में मनाया गया। इस विशेष अवसर पर पारंपरिक जन्मदिन समारोह की जगह एक स्वस्थ और पर्यावरण अनुकूल आयोजन किया गया, जिसमें स्वाद और सेहत के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश प्रमुख रहा।
जन्मदिवस कार्यक्रम में केक, पेस्ट्री और मिठाइयों की जगह ताजे और रसीले मौसमी फल, रंग-बिरंगी सब्जियाँ, पौष्टिक सलाद, प्रोबायोटिक्स, शहद, मेवे और स्वास्थ्यवर्धक पेय परोसे गए। यह केवल एक उत्सव नहीं बल्कि ’स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है’ का सजीव उदाहरण था। समारोह के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। रासायनिक और प्रदूषण फैलाने वाले प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों के स्थान पर मिट्टी के गणेश जी की स्थापना का भी संकल्प लिया गया, जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव को रोका जा सके। इस अवसर पर यह भी तय किया गया कि प्रत्येक सहभागी अपने घर में किचन गार्डन विकसित कर सब्जियाँ उगाने की पहल करेगा, ताकि रसायन-मुक्त ताजा भोजन और हरियाली को बढ़ावा दिया जा सके।
इस प्रेरणादायक आयोजन के सूत्रधार थे साइंटिफिक होलिस्टिक केयर एंड वेलनेस मोटिवेटर डॉ. संजय सोनी जिन्होंने संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम में नेत्र चिकित्सक डॉ. एस. के. गुप्ता, रेटिना विशेषज्ञ डॉ. निपुण बागरेचा, नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सुरभि मीना, नेत्र विशेषज्ञ डॉ. डिम्पल, नेत्र विशेषज्ञ डॉ. हर्षिल और सुवि आई हॉस्पिटल की पूरी टीम ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय ने इस अवसर पर कहा कि जन्मदिन केवल व्यक्तिगत खुशी का अवसर नहीं बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए सकारात्मक संदेश देने का भी एक अवसर है। स्वस्थ भोजन, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को अपनाकर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।कार्यक्रम के अंत में सभी ने पौधारोपण किया और यह संकल्प दोहराया कि आने वाले वर्ष में प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएगा और उसकी देखभाल करेगा। यह जन्मदिन समारोह न केवल यादगार रहा बल्कि उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में स्वास्थ्य, प्रकृति और सकारात्मक सोच के नए बीज भी बो गया।


