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एक अध्यापक जिसने बदल दी गांव की सूरत, शिक्षा, सामाजिक सुधार और अनुशासन की मिसाल बने प्रधानाचार्य मोहम्मद अख्तर नदीम

एजाज़ अहमद उस्मानी

स्मार्ट हलचल|आज के समय में जब शिक्षा को केवल नौकरी पाने का माध्यम समझा जाने लगा है, ऐसे दौर में कुछ शिक्षक ऐसे भी होते हैं जो शिक्षा को समाज परिवर्तन का सशक्त औज़ार बना देते हैं। ऐसे ही एक असाधारण व्यक्तित्व हैं प्रधानाचार्य मोहम्मद अख्तर नदीम, जिन्होंने अपने विचारों, नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति से न केवल एक विद्यालय बल्कि पूरे गांव की तस्वीर बदल दी।

गांव में सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार

प्रधानाचार्य मोहम्मद अख्तर नदीम ने गांव में फैली सामाजिक कुरीतियों को चुनौती दी। उन्होंने मृत्यु भोज जैसी अनावश्यक और आर्थिक रूप से बोझिल परंपरा तथा डीजे संस्कृति से होने वाले सामाजिक व नैतिक नुकसान को देखते हुए इनके खिलाफ जनजागरण अभियान चलाया।
उनके प्रयासों का परिणाम यह हुआ कि गांव में मृत्यु भोज और डीजे पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई। यह निर्णय न केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत बना, बल्कि गांव में सादगी, शांति और सामाजिक समरसता का वातावरण भी बना।

पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जारोड़ा: गुणवत्ता की पहचान

प्रधानाचार्य मोहम्मद अख्तर नदीम वर्तमान में पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जारोड़ा में प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में यह विद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं रहा, बल्कि अनुशासन, संस्कार और उत्कृष्ट शिक्षा का केंद्र बन गया।
विद्यालय की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि यहाँ पढ़ने वाला हर तीसरा विद्यार्थी आज सरकारी नौकरी में है। यह आंकड़ा अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि सही दिशा, मेहनत और समर्पण से सरकारी विद्यालय भी उत्कृष्ट परिणाम दे सकते हैं।

निजी शिक्षण संस्थानों का बंद होना: सरकारी स्कूल की सफलता

एक रोचक और गर्व की बात यह है कि गांव में आज एक भी निजी शिक्षण संस्थान संचालित नहीं है। कारण यह नहीं कि लोग शिक्षा से विमुख हैं, बल्कि कारण यह है कि सरकारी विद्यालय में दी जा रही उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के सामने निजी संस्थान टिक नहीं पाए।
जहाँ आमतौर पर लोग निजी स्कूलों को बेहतर मानते हैं, वहीं जारोड़ा गांव ने इस धारणा को तोड़ते हुए यह साबित किया कि अगर नेतृत्व ईमानदार हो और शिक्षक समर्पित हों, तो सरकारी विद्यालय भी आदर्श बन सकते हैं।

शिक्षा के साथ संस्कारों पर ज़ोर

प्रधानाचार्य नदीम का मानना है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। वे विद्यार्थियों को अनुशासन, नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और देशसेवा के संस्कार भी देते हैं।
विद्यालय में नियमित रूप से प्रेरणादायक संवाद, करियर मार्गदर्शन, सामाजिक विषयों पर चर्चा और अनुशासनात्मक गतिविधियाँ कराई जाती हैं, जिससे विद्यार्थी जीवन के हर क्षेत्र में सफल बन सकें।

गांव के लिए प्रेरणा, समाज के लिए उदाहरण

मोहम्मद अख्तर नदीम आज केवल एक प्रधानाचार्य नहीं, बल्कि गांव के मार्गदर्शक, समाज सुधारक और युवाओं के प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि यदि एक शिक्षक ठान ले, तो वह पीढ़ियों का भविष्य बदल सकता है।

निष्कर्ष

प्रधानाचार्य मोहम्मद अख्तर नदीम की कहानी हमें यह सिखाती है कि शिक्षा की असली ताकत क्या होती है। उन्होंने अपने कार्यों से यह साबित किया कि एक ईमानदार अध्यापक न केवल बच्चों का भविष्य संवार सकता है, बल्कि पूरे समाज की दिशा और दशा बदल सकता है।
आज जारोड़ा गांव शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक सुधार का प्रतीक बन चुका है—और इसके केंद्र में हैं एक समर्पित शिक्षक, मोहम्मद अख्तर नदीम।

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