रणवीर सिंह चौहान
स्मार्ट हलचल/ भवानी मंडी.नेत्रदान जीवन के अंतिम समय में भी परोपकार का सर्वश्रेष्ठ कार्य है, इसी जागरूकता के चलते झालावाड़ जिले में नेत्रदान का दायरा बढ़ता जा रहा है, डग कस्बे में गुरुवार रात्रि को परोपकार का अनुठा उदाहरण देखने को मिला जब अनाज व्यापारी केसरीमल चौरडिया के निधन होने पर परिवार ने नेत्रदान किया।
शाइन इंडिया फाउंडेशन एवं भारत विकास परिषद के नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि डग कस्बे के अनाज व्यापारी केसरीमल चौरडिया का गुरुवार शाम को हृदयाघात के कारण निधन होने पर पंकज नाहर, पंकज कटारिया एवं भानेज भेरूलाल चौधरी (ब्लॉक उपाध्यक्ष कांग्रेस सेवादल) के द्वारा पुत्र अमित एवं भवानीमंडी निवासी भतीजे अभय कुमार को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया तथा परिवार की सहमति मिलने पर डग से 180 किलोमीटर कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ लेकर डग के लिये रवाना हुए। देर रात बड़ी संख्या में उपस्थित गांववासियों एवं परिवार के सदस्यों के बीच नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई, इस दौरान उपस्थित लोगो ने नेत्रदान की प्रक्रिया को अपनी आंखों से देखा एवं डॉ गौड़ के द्वारा भ्रान्तियों का निवारण किया गया। नेत्रदान प्रक्रिया में सुशील जैन, पंकज नाहर, पिंटू जैन, पंकज कटारिया, लोकेश जैन, मेघराज जैन, पवन जैन सहित जैन सोशल ग्रुप के सदस्यों ने सहयोग किया। नेत्रदान की प्रक्रिया के बाद डॉ गौड़ ने परिवार के सभी सदस्यों को संस्था की ओर से प्रशस्ति पत्र और नेत्रदान गरिमा पट्टीका भेंट की।
शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गौड़ एवं कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि केसरीमलजी का नेत्रदान डग का दूसरा नेत्रदान है, इससे पूर्व 2021 में स्वर्गीय रेखा जैन का नेत्रदान भी संस्था के माध्यम से डग के मुक्तिधाम में संपन्न हुआ था।
श्रद्धांजलि सभा में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र जैन ने नेत्रदान को मानवता का सबसे बड़ा परोपकार बताते हुए कहा कि विभाग के द्वारा डग में नेत्रदान संकल्प कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा वही नेत्रदानी केसरीमल चौरडिया के पुत्र अमित चौरडिया ने बताया कि नेत्रदान ने उनके पिता की ज्योति को अमर किया है।
नेत्र उत्तसरण प्रक्रिया से प्राप्त कोर्निया लेकर रात तीन बजे कोटा पहुंचने के बाद डॉ गौड़ ने बताया कि शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम 200 किलोमीटर के दायरे में तेज ठंड और घने कोहरे में भी नेत्रदान के लिए चौबीस घंटे तत्पर रहती है।


