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उपभोक्ता अधिकार समिति ने मानसरोवर झील संरक्षण के लिए की ठोस कार्रवाई की मांग

 (पंकज पोरवाल)

भीलवाड़ा।स्मार्ट हलचल| शहर की कभी सुंदरता और पर्यटन का केंद्र रही मानसरोवर झील आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। झील की इसी दुर्दशा, प्रदूषण और अतिक्रमण के गंभीर मुद्दे को लेकर उपभोक्ता अधिकार समिति (रजि.) के एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर रणजीत सिंह से मुलाकात कर उन्हें नगर विकास न्यास के अध्यक्ष एवं जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू के नाम ज्ञापन सौंपा। समिति के केंद्रीय अध्यक्ष सुनील राठी ने कलेक्टर को बताया कि जो झील कुछ वर्ष पूर्व शहर का गौरव थी, वह आज गंदगी, जलकुंभी और अवैध कब्जों के कारण खत्म होने की कगार पर है। ज्ञापन में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया कि झील में शहर के नालों का गंदा पानी और प्लास्टिक कचरा धड़ल्ले से फेंका जा रहा है, जिससे न केवल पानी प्रदूषित हो रहा है बल्कि ऑक्सीजन की कमी और संदिग्ध जहरीले पदार्थों के कारण जलीय जीवों व मछलियों की भारी संख्या में मौत हो रही है। समिति ने प्रशासन को अवगत कराया कि सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों-करोड़ों खर्च होने के बावजूद धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और पूरी झील जलकुंभी से ढकी होने के कारण यहां आम जनता का आवागमन तक बंद हो गया है। अवैध निर्माण और शहरीकरण के कारण झील का दायरा लगातार सिकुड़ता जा रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्र का भूजल स्तर भी प्रभावित हो रहा है। समिति ने मांग की है कि झील की नियमित सफाई का सघन अभियान चलाया जाए, मछलियों की मौत के कारणों की उच्च स्तरीय जांच हो और पानी की गुणवत्ता की मासिक जांच सुनिश्चित की जाए। साथ ही झील का गहरीकरण कर इसे पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की मांग भी पुरजोर तरीके से रखी गई। ज्ञापन सौंपते समय महिला जिलाध्यक्ष अर्चना दुबे, युवा मोर्चा से अंकित सोमानी, हार्दिक सोनी, त्रिदेव मूंदड़ा, अखिल झंवर और लादूराम वैष्णव सहित संगठन के कई अन्य सदस्य भी मौजूद रहे और सभी ने एक स्वर में झील संरक्षण के लिए ठोस कार्रवाई की मांग की।

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