200 जवानों की कड़ी सुरक्षा, निषेधाज्ञा के बीच जेसीबी गरजीय आधा दर्जन कथित मजारें और अस्थायी कब्जे हटाए गए
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल।शाहपुरा शहर में गुरुवार का दिन प्रशासनिक सख्ती, भारी सुरक्षा और बहुप्रतीक्षित कार्रवाई के नाम रहा। पुराने बस स्टैंड के पास स्थित सुलतान शाह की बावड़ी के पास में नगर पालिका शाहपुरा ने वर्षों से चले आ रहे विवादित अतिक्रमण पर आखिरकार बड़ा प्रहार करते हुए पीला पंजा चला दिया। सुबह से ही प्रशासनिक अमला पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर गया और देखते ही देखते विवादित क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान शहर में तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित माहौल बना रहा।
यह कार्रवाई केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे प्रशासन की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता और न्यायालय के आदेशों के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में भी देखा जा रहा है। क्षेत्र में किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने, इसके लिए प्रशासन ने पहले से ही कड़े बंदोबस्त कर रखे थे।
निषेधाज्ञा लागू, पूरे शहर में हाई अलर्ट–
कार्रवाई से पहले ही शाहपुरा उपखंड अधिकारी सुनील मीणा ने संभावित संवेदनशीलता को देखते हुए बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। प्रशासन ने साफ संकेत दिया कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सुबह होते ही पूरे विवादित क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई। लोहे की बैरिकेडिंग लगाई गई और चप्पे-चप्पे पर पुलिस जवान तैनात कर दिए गए। पुराने बस स्टैंड से बावड़ी क्षेत्र तक हर आने-जाने वाले मार्ग पर पुलिस की पैनी नजर थी। स्थानीय लोगों के बीच कार्रवाई को लेकर उत्सुकता और चर्चा दोनों बनी रही।
वर्षों पुराना था विवाद-
सुलतान शाह की बावड़ी के आसपास की भूमि लंबे समय से विवाद का केंद्र बनी हुई थी। इस भूमि पर वक्फ कमेटी और नगर पालिका शाहपुरा के बीच स्वामित्व को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही थी। वक्फ कमेटी ने लगभग एक बीघा 10 बिस्वा भूमि पर अपना दावा जताया था और इसे वक्फ संपत्ति बताया था। मामला राजस्थान वक्फ ट्रायब्यूनल तक पहुंचा, जहां विस्तृत सुनवाई के बाद ट्रायब्यूनल ने बड़ा फैसला सुनाया। ट्रायब्यूनल ने वक्फ कमेटी के बड़े दावे को खारिज करते हुए केवल 9 गुणा 22 फीट भूमि पर ही उनका अधिकार स्वीकार किया। इसी आदेश के बाद नगर पालिका को विवादित भूमि पर कार्रवाई का रास्ता साफ मिला।
नोटिस के बाद भी नहीं हटा कब्जा–
नगर पालिका ने कार्रवाई से पहले सार्वजनिक नोटिस जारी कर संबंधित लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। नोटिस के बाद कुछ सब्जी विक्रेताओं ने स्थिति की गंभीरता समझते हुए अपने अस्थायी ढांचे हटाने शुरू भी कर दिए थे। हालांकि विवादित हिस्से में कई अस्थायी निर्माण, केबिनें और कथित धार्मिक ढांचे अब भी मौजूद थे। प्रशासन ने अंतिम समय तक स्वैच्छिक हटाने का अवसर दिया, लेकिन जब पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई तो जेसीबी को मैदान में उतार दिया गया।
वक्फ कमेटी ने मांगा समय, प्रशासन ने किया इंतजार–
कार्रवाई शुरू होने के दौरान वक्फ कमेटी के सदर हमीद खान अपने अधिवक्ता ताज मोहम्मद के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों ने प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता कर कहा कि वे संबंधित मजारों को सम्मानपूर्वक हटाने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए कुछ समय दिया जाए। प्रशासन ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए सहयोगात्मक रवैया अपनाया और स्पष्ट कहा कि यदि हटाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर दी जाए तो इंतजार किया जा सकता है। करीब एक घंटे तक प्रशासन ने संयम बनाए रखा और कार्रवाई रोके रखी। लेकिन निर्धारित समय में हटाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद प्रशासन ने निर्णय लेते हुए जेसीबी मशीनों को आगे बढ़ाया।
गरजा पीला पंजा, ध्वस्त हुए कच्चे निर्माण–
कुछ ही क्षणों में जेसीबी मशीनों ने विवादित क्षेत्र में बने कच्चे निर्माणों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। कार्रवाई के दौरान आधा दर्जन कथित मजारों को हटाया गया। इसके अलावा शेष भूमि पर वर्षों से बनी अस्थायी सब्जी मंडी की केबिनों और अन्य कब्जों को भी ध्वस्त कर दिया गया। पीले पंजे की गर्जना के साथ वर्षों पुराना कब्जा धीरे-धीरे साफ होता गया। मौके पर मौजूद लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई को गंभीरता से देखा। कई लोग मोबाइल कैमरों में दृश्य कैद करते नजर आए।
200 जवानों का जाब्ता, हर गतिविधि पर नजर–
कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलेभर से भारी पुलिस बल बुलाया गया। करीब 200 पुलिस जवानों का जाब्ता तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया जा सके। पुलिस जवान आस पास के मकानों की छतों पर भी तैनात रहे।
कार्रवाई के दौरान एएसपी राजेश आर्य, डिप्टी ओमप्रकाश विश्नोई, थाना प्रभारी सुरेश शर्मा, नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी प्रकाश साहू, तहसीलदार भीवंराज परिहार सहित राजस्व, पुलिस और नगर पालिका के कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पुलिस की रणनीति इतनी मजबूत थी कि किसी प्रकार का विरोध उग्र रूप नहीं ले सका। हर गतिविधि पर वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी बनी रही।
प्रशासन बोला- कोर्ट आदेश की पालना हुई
एएसपी राजेश आर्य ने कार्रवाई के बाद कहा कि पूरी कार्रवाई न्यायालय और वक्फ ट्रायब्यूनल के आदेशों की पालना में की गई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की मांग को देखते हुए जिले से अतिरिक्त पुलिस बल मंगवाया गया था। प्रशासन की प्राथमिकता शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना थी, और कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। वहीं नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी प्रकाश साहू ने बताया कि ट्रायब्यूनल के आदेश के अनुसार 9 गुणा 22 फीट भूमि को यथावत छोड़ते हुए बाकी संपूर्ण भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया है।
शहर में चर्चा का केंद्र बनी कार्रवाई–
सुलतान शाह बावड़ी के पास में हुई यह कार्रवाई पूरे शाहपुरा शहर में चर्चा का मुख्य विषय बनी रही। लंबे समय से विवादों में घिरी भूमि पर प्रशासन की निर्णायक कार्रवाई ने साफ संदेश दिया कि न्यायालय के आदेशों की पालना हर हाल में होगी और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नगरवासियों के बीच इस बात को लेकर चर्चा रही कि वर्षों से अटके इस मामले में आखिरकार प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाया। अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि का आगे किस प्रकार उपयोग किया जाएगा। गुरुवार की यह कार्रवाई शाहपुरा प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा थी और प्रशासन ने इसे सख्ती, रणनीति और संयम के साथ सफलतापूर्वक पूरा कर दिया।
