अमर चन्द बैरवा
बांदीकुई/स्मार्ट हलचल|बड़ियाल कलां गांव में इन दिनों बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गांव की गलियों, बाजार, सब्जी मंडी और स्कूल परिसरों में बड़ी संख्या में बंदरों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं, जिससे आमजन में भय का माहौल बना हुआ है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने से भी डरने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बंदर घरों की छतों पर डेरा जमाए हुए हैं और मौका मिलते ही घरों से सामान उठा ले जाते हैं। रसोई में रखा अनाज, फल, सब्जियां, कपड़े और बच्चों की कॉपियां तक बंदर ले जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई बार बंदर घरों में घुसकर तोड़फोड़ भी कर देते हैं, जिससे ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सब्जी की दुकानों पर स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। दुकानदारों के अनुसार बंदर खुलेआम दुकानों से सब्जियां उठाकर ले जाते हैं, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है। ग्राहक भी डर के कारण दुकानों पर रुकने से कतराने लगे हैं। वहीं सब्जी लेने जाने वाले ग्रामीणों को रास्ते में अचानक बंदरों के सामने आ जाने से चोट लगने का खतरा बना रहता है।
सबसे ज्यादा चिंता का विषय बच्चों की सुरक्षा है। स्कूलों के आसपास भी बंदरों का जमावड़ा देखा जा रहा है। बच्चों के स्कूल आने-जाने के समय कई बार बंदर झपट्टा मारने की कोशिश करते हैं, जिससे अभिभावकों में भारी चिंता बनी हुई है। कुछ मामलों में बच्चे घबराकर गिर भी चुके हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर प्रशासन अब तक बेखबर बना हुआ है। गांव के निवासी सुभाष शर्मा ने गांव-गांव में लगाए गए प्रशासनिक शिविर कैंपों में बंदरों की समस्या को लेकर आवेदन भी दिया, लेकिन वहां से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि “लाल मुंह के बंदर हमारे अंडर में नहीं आते।” इस जवाब से ग्रामीणों में भारी रोष है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई कर बंदरों को पकड़वाकर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए, ताकि गांव में फिर से सामान्य जनजीवन बहाल हो सके।













