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किसान आंदोलन: अगले हफ्ते फिर बुलावा भेजेगी सरकार, राकेश टिकैत की दो टूक- दबाव में बातचीत नहीं होगी

नई दिल्ली

अगला हफ्ता किसान आंदोलन में निर्णायक हो सकता है। सरकार बातचीत का नया फॉर्मुला किसानों को दे सकती है और इसका दायरा भी बढ़ा सकती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार किसान संगठनों को को ‘खुलकर’ बातचीत करने का नया प्रस्ताव जल्द देगी। सूत्रों के अनुसार, इसमें सरकार किसानों से ही प्रस्ताव मांगेगी और उस पर विस्तार से उनके सामने बात रखेगी। अगले हफ्ते के अंत तक बातचीत का सिलसिला फिर शुरू हो सकता है। उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई बहस के बाद सरकार की ओर से बात रखेंगे। इसमें वह कानून और टकराव के बीच के रास्ता की बात करेंगे। पिछले दिनों पीएम मोदी ने यह कहकर किसान और सरकार के बीच बातचीत का चैनल खोल दिया था कि कृषि मंत्री किसानों से महज एक फोन की दूरी पर हैं और कानून को डेढ़ साल रद्द करने का सरकार का प्रस्ताव अभी भी कायम है। इसके बाद इसी बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने हालात का जायजा लिया था। पीएम मोदी ने संकेत दिया था कि सरकार किसानों से अभी भी बातचीत के लिए तैयार है।

बातचीत न होने से बढ़ सकता है टकराव

दरअसल, 22 जनवरी को वार्ता विफल होने के बाद से लेकर अब तक सरकार और किसानों के बीच कोई बात नहीं हुई है। सरकार ने 2 जनवरी को यह भी कह दिया कि कानून को डेढ़ साल तक स्थगित करने के प्रस्ताव के बाद अब इससे आगे कुछ नहीं देंगे तो किसान संगठनों ने भी दो टूक कहा था कि कानून वापसी से कम की शर्त मंजूर नहीं। इसके बाद से ही बातचीत किस तरह शुरू हो, इसे लेकर उलझन की स्थिति बनी हुई है। सरकार को पता है कि अब बातचीत का रास्ता अधिक दिनों तक बंद नहीं रखा जा सकता है। संवादहीनता की स्थिति में टकराव बढ़ने का डर है। वहीं, इसके देश के दूसरे हिस्सों तक भी पसरने की आशंका है। विपक्ष अब खुलकर किसान आंदोलन को समर्थन दे रहा है। इस कारण पिछले कुछ दिनों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र जैसे राज्य तक आंदोलन बढ़ा। वहीं, ग्लोबल स्तर पर भी मामला उठने से चिंता बढ़ी। हालांकि, अमेरिका प्रशासन ने किसान कानून को समर्थन दिया लेकिन आंदोलन को समाप्त करने के लिए बातचीत की वकालत की।

वहीं, किसान संगठनों के बीच भी बातचीत शुरू करने का दबाव है। हालांकि, 26 जनवरी को हुई हिंसक आंदोलन के बाद एक बार आंदोलन जरूर कमजोर होता दिखा लेकिन बाद में फिर संभला। सूत्रों के अनुसार, भले महीनों तक बैठने का दावा किसान नेता कर रहे हैं लेकिन लंबा खींचने तक इनके बीच समन्वय की समस्या अभी से आने लगी है। इन्हें लगता है कि एक बार फिर बातचीत शुरू होने से उम्मीद बढ़ेगी और वे एकजुट होकर आंदोलन में जुटे रहेंगे।

बातचीत को तैयार, पर दबाव के माहौल में नहीं : टिकैत
किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि किसान बातचीत करने को तैयार हैं, लेकिन इस प्रेशर में बातचीत नहीं होगी। सरकार पहले किसानों पर से दबाव हटाए। यह किसान नेताओं की शर्त है। संयुक्त किसान मोर्चा इस संबंध में रणनीति तय कर चुका है। उन्होंने फिर दोहराया कि जबतक सरकार उनकी मांगें नहीं मान लेती, वे किसानों के साथ डटे हुए हैं। आंदोलन 2 अक्टूबर तक पहला चरण पूरा कर लेगा। दूसरे चरण की रूपरेखा संयुक्त किसान मोर्चा तय कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंच और पंच जो फैसला करेंगे, आंदोलन वैसा ही जारी रहेगा।

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