डिजिटल युग में साहित्य को नई दिशा देने का समय : ओम बिरला
साहित्य समाज को देता है रचनात्मक दिशा : ओम बिरला
युवाओं को साहित्य और पुस्तकालय संस्कृति से जोड़ने पर जोर
बाल साहित्य, लोकमंथन और पुस्तकालय संस्कृति को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श
कोटा। स्मार्ट हलचल।शक्ति, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना की भूमि हाड़ौती में साहित्य, संस्कृति और भारतीय चिंतन के पुनर्जागरण का स्वर मुखर हुआ। महानगर अध्यक्ष महेश विजय ने बताया कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद, राजस्थान का 9वां प्रदेश अधिवेशन शनिवार को तलवंडी स्थित राजकीय आयुर्वेदिक योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय में प्रारंभ हुआ। दो दिवसीय अधिवेशन में साहित्य की सामाजिक भूमिका, भारतीय ज्ञान परंपरा, लोकभाषाओं के संरक्षण और युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ।
उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारतीय साहित्य केवल शब्दों का सृजन नहीं, बल्कि संस्कृति, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना का संवाहक है। उन्होंने कहा कि 1966 से अखिल भारतीय साहित्य परिषद भारतीय संस्कृति, साहित्य और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा प्रसार का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। परिषद ने गांव-ढाणियों में बैठकर सृजन करने वाले साहित्यकारों की आवाज को मंच प्रदान किया और भारतीय विरासत, इतिहास तथा भविष्य की संभावनाओं को अभिव्यक्ति दी।
ओम बिरला ने कहा कि भारत के साहित्यकारों ने विभिन्न कालखंडों में लोकसंस्कृति को जीवित रखा, भाषाओं और बोलियों को समृद्ध किया तथा अपने लेखन से सामाजिक कुरीतियों और विसंगतियों के विरुद्ध जनचेतना का निर्माण किया। साहित्य ने समाज को रचनात्मक दिशा देने और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में साहित्य परिषद और साहित्यकारों को नई दृष्टि से कार्य करना होगा। प्राचीन और महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों का डिजिटलीकरण कर उन्हें दुनिया तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। साहित्य व्यक्ति के दृष्टिकोण और जीवन-दर्शन को बदलने की क्षमता रखता है। यदि युवा पीढ़ी के विचारों में सकारात्मक परिवर्तन लाना है तो भारतीय साहित्यकारों की रचनाओं को डिजिटल माध्यमों से युवाओं तक पहुंचाना होगा। अकेलेपन और दिशाहीनता के दौर में साहित्य युवाओं के मानसिक और वैचारिक विकास का सशक्त माध्यम बन सकता है।
कोटा की साहित्यिक विरासत का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि यह शहर सांस्कृतिक और साहित्यिक दृष्टि से समृद्ध पहचान रखता है। कोटा ने अनेक साहित्यकार, इतिहासकार और लेखक दिए हैं तथा अध्ययन और साहित्य साधना का प्रमुख केन्द्र रहा है, जिसकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर रही है।
कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महामंत्री डॉ. केशव शर्मा ने किया। स्वागत भाषण में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अन्नाराम शर्मा ने परिषद के उद्देश्यों और साहित्यिक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजस्थान में परिषद के लगभग ढाई हजार सदस्य श्रेष्ठ साहित्य सृजन में सक्रिय हैं। उन्होंने हाड़ौती अंचल की साहित्यिक परंपरा और रीतिकाल से लेकर वर्तमान तक की समृद्ध रचनात्मक धारा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र संस्कृति और अध्यात्म के संरक्षण का महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है।
अखिल भारतीय महामंत्री डॉ. भरत ठाकोर ने अधिवेशन की संगठनात्मक और वैचारिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परिषद संपर्क, संवाद और सांस्कृतिक चेतना के माध्यम से भारतीय जीवन मूल्यों को मजबूत करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सत्य, शिव और सुंदरम् की भारतीय अवधारणा को समाज से जोड़ने के उद्देश्य से अधिवेशन में विभिन्न प्रस्तावों पर विचार किया जाता है।
राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. पवनपुत्र बादल ने कहा कि देश के प्रत्येक क्षेत्र और बोली में अद्भुत साहित्य मौजूद है, जिसे मंच प्रदान करने का कार्य साहित्य परिषद ने किया है। भाषा और बोली से जुड़ाव ही संस्कृति और परंपरा से जुड़ाव का आधार है।
महानगर अध्यक्ष महेश विजय ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि परिषद लोकभाषाओं, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि साहित्य ऐसा होना चाहिए जो समाज और भविष्य दोनों का मार्गदर्शन करे।
मुख्य संयोजक विष्णु शर्मा हरिहर ने बताया कि द्वितीय सत्र में ‘लोकमंथन’, बाल साहित्य और लोकसाहित्य पर चर्चा हुई। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को साहित्य के माध्यम से युवाओं तक पहुंचाने और उन्हें पुस्तकालय एवं अध्ययन संस्कृति से जोड़ने पर विशेष विचार-विमर्श किया गया। ‘सेल्फी विद लाइब्रेरी’ जैसे अभियानों के माध्यम से नई पीढ़ी को मोबाइल की सीमित दुनिया से निकालकर पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में अतिरिक्त निदेशक आयुर्वेद डॉ. अंजना शर्मा, महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. नित्यानंद शर्मा, सहसंयोजक राजेन्द्र गौड़, कोटा विभाग संयोजक योगीराज, प्रचार मंत्री राजेन्द्र मोरपा सहित परिषद के विभिन्न प्रांतीय और संगठनात्मक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
