सैफई: स्मार्ट हलचल|उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में उपचार के दौरान 19 वर्षीय युवती की मौत के बाद सामने आए 89 सेकेंड के वायरल वीडियो ने चिकित्सा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। अस्पताल के बेड पर नाक में नली लगी अवस्था में दर्द से कराहती युवती ने मौत से पहले जो आरोप लगाए, उसने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और मरीजों के प्रति व्यवहार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जसवंतनगर क्षेत्र के मोहल्ला फक्कड़पुरा निवासी नाहिदा पुत्री मुस्ताक को ब्लड इंफेक्शन की शिकायत पर तीन अप्रैल को उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में भर्ती कराया गया था। दो दिन उपचार के बाद पांच अप्रैल को उसकी मौत हो गई। नाहिदा की मौत के बाद उसका अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर बुधवार को वायरल हो गया, जिसने पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया।
करीब 89 सेकेंड के वायरल वीडियो में नाहिदा गंभीर हालत में चिकित्सकीय स्टाफ के व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगाती सुनाई दे रही है। वीडियो में वह कहती है— मैडम बोल रही थीं,उन्हें लगा कि हम सुन नहीं रहे हैं… यह चे-चे कर रही है, लात मारकर बाहर निकलेगी… जब ऑपरेशन करने बैठीं तो हम रो रहे थे… हम कह रहे थे छोड़ दो, छोड़ दो… तब वह मान नहीं रही थीं… कह रही थीं इसके मुंह में कपड़ा ठूस दो… हम रोते जा रहे थे, हमें छोड़ा नहीं… हमारी गर्दन काट दी इतनी…
वीडियो में उसकी पीड़ा और टूटती आवाज ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। नाहिदा बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से थी। स्वजन के अनुसार परिवार में तीन बेटियां और एक छोटा बेटा है, जिनमें नाहिदा तीसरे नंबर की थी। उसकी असमय मौत के बाद घर का माहौल गमगीन है। परिजनों का कहना है कि वे इतने पढ़े-लिखे नहीं हैं कि कानूनी लड़ाई लड़ सकें या प्रक्रिया समझ सकें। परिवार का दर्द छलक पड़ा जब स्वजन ने कहा, हम तो ऊपर वाले से न्याय की मांग कर रहे हैं। जिन लोगों ने लापरवाही की है, उनका न्याय ऊपर वाला करेगा।
वीडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी है। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. डॉ.सोमेन्द्र पाल सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो के संज्ञान में आने के बाद पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला इसलिए और संवेदनशील हो गया है क्योंकि बीते समय में भी विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर कई प्रश्न उठते रहे हैं। अब एक गरीब परिवार की बेटी की मौत और उससे पहले सामने आया वीडियो चिकित्सा व्यवस्था की संवेदनशीलता को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।
