Homeराष्ट्रीयमहत्वाकांक्षी सहयोग रोडमैप पर सहमत हुए भारत और कनाडा

महत्वाकांक्षी सहयोग रोडमैप पर सहमत हुए भारत और कनाडा

शाश्वत तिवारी

नई दिल्ली।स्मार्ट हलचल|भारत के आधिकारिक दौरे पर आईं कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने यहां 13 अक्टूबर को अपने भारतीय समकक्ष डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। बैठक में दोनों देशों ने आपसी भरोसा बहाल करने और बहु-क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने के संकल्प को दोहराया। इस दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत-कनाडा संबंध पिछले दो महीनों में लगातार प्रगति कर रहे हैं और हम अपने साझेदारी तंत्र को फिर से सक्रिय एवं सशक्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम एक महत्वाकांक्षी सहयोग रोडमैप पर सहमत हुए हैं।
जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा आज नई दिल्ली में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद का स्वागत करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है। हमारी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक तंत्रों को पुनर्स्थापित और पुनर्जीवित करने हेतु रचनात्मक चर्चा हुई। वैश्विक घटनाक्रमों और साझा चुनौतियों के प्रति हमारी प्रतिक्रियाओं पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। हम एक महत्वाकांक्षी सहयोग रोडमैप पर भी सहमत हुए और अपने सहयोग के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया का नेतृत्व करने पर भी सहमत हुए ताकि यह हमारे नेताओं की अपेक्षाओं और हमारे लोगों के हितों के अनुरूप हो।
आनंद के साथ बैठक के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने अपने प्रारंभिक भाषण में कहा जब हम कनाडा को देखते हैं, तो हमें एक पूरक अर्थव्यवस्था, एक खुला समाज, विविधता और बहुलवाद दिखाई देता है और हमारा मानना है कि यही एक घनिष्ठ, टिकाऊ और दीर्घकालिक सहयोगात्मक ढांचे का आधार है। आज की हमारी बैठक के लिए दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, कृषि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, असैन्य परमाणु सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में हमारे सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है।
बैठक के बाद कनाडाई विदेश मंत्री ने कहा हमारा उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को ऊंचा उठाना और इसे दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाना है। दोनों देश इस बात पर सहमत हैं कि संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की आवश्यकता है। यह संयुक्त बयान हमारी दोबारा जुड़ाव की योजनाओं को स्पष्ट करेगा और यह संदेश देगा कि भारत और कनाडा दोनों दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में।

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