मुकेश खटीक
भीलवाड़ा।राजस्थान में मंसूरी समाज की जनसंख्या लगभग 30 से 40 लाख के बीच बताई जाती है।परंपरागत रूप से समाज का मुख्य व्यवसाय रजाई-गद्दे बनाना,तेल घाणी चलाना एवं मजदूरी रहा है।बदलते समय,मशीनीकरण और औद्योगिक इकाइयों के बढ़ते प्रभाव के चलते बीते 15 से 20 वर्षों में समाज का पारंपरिक व्यवसाय लगभग पूरी तरह समाप्त हो गया है,जिससे मंसूरी समाज गंभीर बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहा है।सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आजादी के बाद विशेष रूप से मंसूरी समाज शैक्षणिक और आर्थिक दृष्टि से लगातार पिछड़ता चला गया।इसके विपरीत,राज्य सरकार ने पिछले पांच वर्षों में कई पिछड़े समाजों के उत्थान हेतु विकास बोर्डों का गठन कर कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं।इनमें वीर तेजाजी बोर्ड, देवनारायण बोर्ड,रजत कला कल्याण बोर्ड,केश कला बोर्ड सहित अन्य बोर्ड शामिल हैं,जिनसे संबंधित समाजों को लाभ मिला है।इसी क्रम में राजस्थान का संपूर्ण मंसूरी समाज पिछले लगभग दस वर्षों से मंसूरी विकास बोर्ड के गठन की लगातार मांग करता आ रहा है।समाज द्वारा प्रदेश के सभी जिलों से जिला कलेक्टरों के माध्यम से ज्ञापन भेजे जा चुके हैं।सामाजिक कार्यकर्ता मुबारक मंसूरी ओपेरा ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके द्वारा जिला कलेक्टर भीलवाड़ा,संभागीय आयुक्त अजमेर,अल्पसंख्यक मंत्री,विधानसभा अध्यक्ष,मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार जयपुर तथा राज्यपाल महोदय को सैकड़ों पत्र एवं ज्ञापन प्रेषित किए जा चुके हैं।उन्होंने बताया कि मंसूरी समाज की इस मांग को लेकर भीलवाड़ा जिले से 7 जून 2023 से 19 जून 2023 तक भीलवाड़ा जिला मुख्यालय से विजयनगर,नसीराबाद, अजमेर,किशनगढ़ होते हुए जयपुर मुख्यमंत्री आवास तक पैदल यात्रा निकाली गई।भीषण गर्मी में की गई इस पदयात्रा में सैकड़ों की संख्या में मंसूरी समाज के लोग शामिल हुए और मुख्यमंत्री से मिलकर मंसूरी विकास बोर्ड के गठन की मांग का ज्ञापन सौंपा गया।
इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा समाज की मांग को उचित बताते हुए समय आने पर पूरा करने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन आज तक न तो मंसूरी विकास बोर्ड का गठन हुआ है और न ही समाज के लिए कोई विशेष कल्याणकारी योजना लागू की गई है।मंसूरी समाज के लोगों ने राज्य सरकार से पुनःआग्रह किया है कि शीघ्र मंसूरी विकास बोर्ड का गठन कर समाज को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं,ताकि शैक्षणिक,आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े मंसूरी समाज को राज्य और राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और उन्हें वास्तविक राहत मिल सके।


