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Home भीलवाड़ा आसाराम बापू आश्रम की ओर से मनाया गया मातृ पितृ पूजन दिवस

आसाराम बापू आश्रम की ओर से मनाया गया मातृ पितृ पूजन दिवस

भीलवाडा l श्री योग वेदांत सेवा समिति द्वारा आज शहर के मध्य में सूचना केंद्र चौराहे पर मातृ पितृ पूजन दिवस मनाकर पाश्चात्य संस्कृति के कुप्रभावो का महत्व समझाया गया । जहां एक और भारत भर में युवा पीढ़ी द्वारा वैलेंटाइन डे के चक्करो में फंसकर अनैतिक रूप से अपने जीवन को बर्बाद किया जा रहा है।वही, योग वेदांत सेवा समिति व संत आसाराम बापू आश्रम  द्वारा किए जा रहे मातृ पितृ पूजन दिवस का यह आयोजन ऐसे कलयुगी दौर में युवा पीढ़ी को सतमार्ग पर ले जाने के लिए रामबाण साबित हो रहा है। संत आसाराम बापू आश्रम संचालक कैलाश शर्मा ने बताया कि  वर्तमान में युवा पीढ़ी अनुचित मार्गदर्शन एवं पाश्चात्य संस्कृति के चलन में अपने माता पिता के प्यार को भूल कर अनर्गल एवं अनैतिक गतिविधियों में अपना जीवन पथ भ्रष्ट कर रही हैं। कई वर्षों पूर्व संत आसाराम बापू द्वारा चलाई गई मातृ पितृ पूजन दिवस की परंपरा को साकार कर बच्चों द्वारा सूचना केंद्र चौराहे पर अपने अपने माता-पिता का पूजन कर तिलक लगाकर माल्यार्पण किया गया और माता-पिता ने भी अपने बच्चों के सिर पर हाथ रखकर शुभाशीष देकर बच्चों का मुंह मीठा करवाया ।माता पिता ने बच्चों को भावपूर्ण शुभाशीष देते हुए आशीर्वाद दिया। मातृ पितृ पूजन दिवस के इस कार्यक्रम को जिस किसी शहर वासी ने देखा संत आसाराम बापू द्वारा चलाए गए इस अभियान की भूरिभूरि प्रशंसा करने से खुद को नहीं रोक पाया । ज्ञातव्य रहे की कुछ वर्षों पूर्व से ही शुरू हुए मातृ पितृ पूजन दिवस की इस परंपरा को कई राज्यों की सरकारों द्वारा भी अपने राज्य के कई विद्यालयों में बच्चों को माता पिता का पूजन करने को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं । पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में  पड़ने के कारण आज देश के हालात यह हैं कि सामाजिक तानाबानों के बीच ऐसे बुजुर्गों की संख्या भारत में बढ़ रही है जिनकी सार संभाल करने वाला कोई परिजन भी नहीं है। ऐसे बुजुर्गों के लिए आसरा या तो वृद्धाश्रम बनता है या फिर कहीं और रहकर किसी तरह कोई काम कर अपना गुजर बसर करते हैं। हैरान करने वाले आंकड़े यह बताते हैं कि भारत में 42 प्रतिशत बुजुर्ग (60 साल से ऊपर) आज भी अपना भरण पोषण करने के लिए काम कर रहे हैं ऐसी स्थिति में संत आसाराम बापू आश्रम द्वारा चलाए जा रहे मातृ पितृ पूजन दिवस के इस अभियान वाकई काबिले तारीफ है क्योंकि यही एक रास्ता है जिससे आज की युवा पीढ़ी को अपने अपने माता पिता के प्यार एवं विश्वास को समझा कर सही रास्ते पर लाया जा सकता है अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब देश की रक्षा करने वाली युवा पीढ़ी खुद ही देश की दुश्मन बन जाएगी

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