खाकी के साथ ‘डिजिटल कवच’: आसींद की पहली महिला थाना अधिकारी श्रद्धा पचौरी बनीं आत्मनिर्भरता का चेहरा

 

दिनेश साहू

आसींद ।स्मार्ट हलचल|”जब एक महिला आत्मनिर्भर होती है, तो वह न केवल अपना बल्कि पूरे समाज का भविष्य संवारती है।” यह शब्द हैं भीलवाड़ा जिले के आसींद थाने की कमान संभाल रहीं सीआई श्रद्धा पचौरी के। भरतपुर से राजस्थान पुलिस में उपनिरीक्षक (SI) के रूप में अपने सफर की शुरुआत करने वाली श्रद्धा पचौरी आज अपनी मेहनत और कर्तव्यनिष्ठा के दम पर न केवल पुलिस निरीक्षक (CI) बनी हैं, बल्कि आसींद थाने के इतिहास में पहली महिला थाना अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही हैं।
अनुभव और चुनौतियों से भरा सफर
सीआई श्रद्धा पचौरी का पुलिसिंग करियर उपलब्धियों और कड़े अनुभवों की भट्टी में तपकर निखरा है। आसींद से पूर्व उन्होंने भीलवाड़ा के शक्करगढ़ और काछौला जैसे चुनौतीपूर्ण थानों में एसएचओ (SHO) के रूप में अपनी धाक जमाई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने में उनकी कुशलता का प्रमाण इस बात से मिलता है कि उन्होंने क्षेत्र में संवेदनशील विधानसभा चुनाव भी अत्यंत शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न करवाए हैं।
‘गिव टू गेन’: समानता का नया वैश्विक मंत्र
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम ‘गिव टू गेन’ (Give to Gain) को धरातल पर उतारते हुए श्रद्धा पचौरी कहती हैं कि सहयोग और उदारता ही लैंगिक समानता का असली आधार है। उनके अनुसार, “जब हम समाज को अपनी सुरक्षा, समय और जागरूकता का ‘दान’ देते हैं, तो बदले में हमें एक सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर समाज का ‘लाभ’ प्राप्त होता है।”
स्कूल-कॉलेजों में ‘डिजिटल कवच’ की पाठशाला
आसींद थाने का कार्यभार संभालने के बाद से ही सीआई पचौरी लगातार सक्रिय हैं। वे केवल ऑफिस तक सीमित न रहकर क्षेत्र के राजकीय विद्यालयों और राजकीय महाविद्यालयों में जाकर छात्राओं से सीधा संवाद कर रही हैं।
RAJCOP Citizen App: वे बालिकाओं को राज्य सरकार की ‘डिजिटल कवच’ योजना के तहत इस ऐप को डाउनलोड करने और इसके उपयोग के लिए प्रेरित कर रही हैं।
आपातकालीन मदद: हेल्पलाइन नंबर 1090, 100 और 112 की जानकारी देकर वे छात्राओं के भीतर से पुलिस का डर निकाल रही हैं।
आत्मनिर्भरता संवाद: उनका मुख्य उद्देश्य छात्राओं को यह समझाना है कि शिक्षा और सजगता ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगी।
ग्रामीण बेटियों के लिए नई उम्मीद
एक महिला अधिकारी के रूप में श्रद्धा पचौरी का स्पष्ट संदेश है— “ग्रामीण परिवेश की बेटियों को डरने की नहीं, बल्कि पढ़ने और निडर होकर आगे बढ़ने की जरूरत है।” वे एक ऐसी व्यवस्था बनाने में जुटी हैं जहाँ हर बेटी बिना किसी संकोच के पुलिस से संवाद कर सके और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सके।
स्टोरी के मुख्य आकर्षण (Key Highlights):
भरतपुर से आसींद तक: राजस्थान पुलिस में SI से CI पद तक का प्रेरणादायी सफर।
क्षेत्रीय अनुभव: शक्करगढ़ और काछौला थानों में सफल नेतृत्व और विधानसभा चुनाव का प्रबंधन।
ऐतिहासिक उपलब्धि: आसींद थाने की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी।
सक्रिय फील्ड वर्क: स्कूलों और कॉलेजों में जाकर ‘डिजिटल कवच’ और ‘RAJCOP App’ के प्रति जागरूकता।
2026 की थीम: ‘गिव टू गेन’ अभियान के माध्यम से समाज में लैंगिक समानता का संदेश।
सुरक्षा और परामर्श: घरेलू हिंसा और महिला उत्पीड़न के विरुद्ध त्वरित कानूनी सहायता और काउंसलिंग।