आस्था के पथ पर ‘रोडवेज’ का रोड़ा: भीलवाड़ा से सांवरिया सेठ वाया पहुना राशमी मार्ग पर लाखों श्रद्धालु परेशान, रोडवेज बस सेवा से वंचित , सरकार ने किया निजी भरोसे

सत्यनारायण सेन गुरला

भीलवाड़ा। मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्री सांवरिया सेठ के दर्शनों की चाह रखने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए सरकारी परिवहन सेवा आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। भीलवाड़ा से वाया गुरलां, कारोई, पहुना, राशमी , मातृकुंडिया,शनि धाम, कपासन और भादसोड़ा होकर सांवरिया जी जाने वाला मार्ग धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से, मेवाड़ के आस्था से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान व मार्ग है, लेकिन यहाँ रोडवेज बसों से यह स्थान नहीं जुड़े है।

धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र, फिर भी उपेक्षा

इस मार्ग पर स्थित गुरलां – पर्यटन स्थल भीलवाड़ा के काश्मीर से जाना जाता,कारोई -अपनी ज्योतिष गणनाओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है,28 फिट के लेटें हुए सांवरिया हनुमानजी, पहुंना – मरमी माता का स्थान,राशमी – मेवाड़ का प्रसिद्ध स्थल मातृकुंडिया, शनि महाराज मंदिर (शनि धाम) पश्चिमी राजस्थान के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। कपासन – हजरत दिवाना शाह दरगाह, भादसोड़ा – सांवरिया धाम का प्रवेश द्वार मंडपिया – मेवाड़ का प्रसिद्ध सांवरिया सेठ का मन्दिर होने के बावजूद इसके, चित्तौड़गढ़ व भीलवाड़ा के साथ अन्य रोडवेज डिपो द्वारा इस रूट पर बसें नहीं संचालित की जा रही हैं।

निजी ऑपरेटरों की मनमानी और सुरक्षा का खतरा*

रोडवेज बसें नहीं चलने का सीधा फायदा निजी बस संचालक उठा रहे हैं।

अत्यधिक किराया : श्रद्धालुओं का आरोप है कि निजी बसों में अक्सर निर्धारित दर से अधिक किराया वसूला जाता है।

ओवरलोडिंग: बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं, जिससे हादसों का डर बना रहता है।

समय की अनिश्चितता: निजी बसें सवारियों के चक्कर में हर कस्बे में लंबा ठहराव करती हैं, जिससे यात्रा का समय बढ़ जाता है।

बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानी

सरकार द्वारा महिलाओं को रोडवेज किराए में दी गई 50% छूट और बुजुर्गों को मिलने वाली रियायतों का लाभ इस मार्ग के यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि उन्हें मजबूरी में निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि भीलवाड़ा से सांवरिया जी के लिए रोडवेज बस की सुविधा होनी चाहिए।

भक्तों का दर्द: “सरकार को सिर्फ वोट चाहिए, सुविधा नहीं”

स्थानीय ग्रामीण और सांवरिया जी जाने वाले यात्रियों का कहना है कि चित्तौड़गढ़ डिपो इस रूट की अनदेखी कर रहा है। जबकि 80 प्रतिशत क्षेत्र चित्तौड़गढ़ जिले का आता है और धार्मिक स्थलों होने के बावजूद रोडवेज बस चलने की अनदेखी कर रहे हैं राशमी और कपासन जैसे व्यस्त इलाकों के लिए रोडवेज बस सेवा की मांग लंबे समय से लंबित है, लेकिन विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है।

रोडवेज प्रशासन की मनमानी से एक रुट तो हरा-भरा तो दुसरा रुट बिल्कुल सुखा

रोडवेज प्रशासन ने जहां भीलवाड़ा से सांवरिया सेठ वाया चित्तौड़गढ़ रुट पर चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा सहित अन्य कई डिपो की बहुत सी बसें चलती हैं रोडवेज बस हरा-भरा बना रखा तो दुसरी ओर भीलवाड़ा से सांवरिया सेठ वाया गुरलां कारोई पहुना राशमी मातृकुंडिया शनि धाम कपासन भादसोड़ा रोड पर एक भी बस नहीं चलती है यह मार्ग सुखा हुआ है रोडवेज बसों से इसलिए कारोई पहुना राशमी शनि धाम रुट पर रोडवेज बसें चलाई जाए

इस रूट पर चलती थी रोडवेज बस उसे भी बन्द कर दिया

सांवरिया सेठ से भीलवाड़ा वाया भादसोड़ा कपासन शनिदेव धाम राशमी पहुना कारोई गुरला के लिए रोडवेज बस चलती थी उसे कोराना के बाद बन्द कर दी

जनता की मांग:

क्षेत्र के ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने परिवहन विभाग से मांग की है कि भीलवाड़ा से सांवरिया सेठ वाया गुरलां कारोई पहुना राशमी-कपासन मार्ग पर नई दो तीन रोडवेज सेवाओं को तुरंत शुरू किया जाए, जिससे भीलवाड़ा से सुबह रोडवेज बस द्वारा यात्रियों को सांवरिया सेठ के दिन में दर्शन कर वापिस भीलवाड़ा पहुच सकें और सांयकाल भीलवाड़ा से रवाना होने वाली रोडवेज बस यात्री को रात्रि रुकने ओर सुबह वापिसी कर भीलवाड़ा पहुच सकें और धार्मिक उत्सवों और एकादशी, अमावस्या जैसे मौकों पर विशेष शटल बसें चलाई जाए ताकि “आस्था के पथ” पर सफर सुगम और सुरक्षित हो सके।