आयुर्वेद का वैश्विक परचम: कैंसर पर वैद्य हंसराज चौधरी की अंग्रेज़ी पुस्तक का विमोचन

मोड़ का निंबाहेड़ा। भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद अब वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना रही है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने भीलवाड़ा जिले में वैद्य हंसराज चौधरी द्वारा लिखित अंग्रेज़ी पुस्तक “Cancer Through Ayurvedic Lens (Resources, Reason, Remedy)” का विमोचन किया।

मंत्री जाधव ने इस अवसर पर आयुर्वेदिक शोध की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य ढांचे के साथ जोड़कर एक मजबूत और टिकाऊ हेल्थ सिस्टम तैयार करने पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता भारत के लिए गर्व का विषय है।

परंपरा से विज्ञान की ओर बढ़ता आयुर्वेद

वैद्य हंसराज चौधरी ने बताया कि आयुर्वेद को अक्सर केवल पारंपरिक दृष्टिकोण से देखा जाता है, लेकिन उनकी यह पुस्तक इसे वैज्ञानिक नजरिए से प्रस्तुत करती है। अंग्रेज़ी में लिखी गई यह पुस्तक आयुर्वेद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पुस्तक में कैंसर के विभिन्न प्रकार, उनके लक्षण, कारण, जांच और उपचार का समग्र विवरण दिया गया है। खास बात यह है कि इसमें आयुर्वेद के साथ एलोपैथी और होम्योपैथी का समन्वित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है, जिससे चिकित्सा क्षेत्र में एक नई सोच को बढ़ावा मिलता है।

औषधीय पौधों पर सरकार का जोर

कार्यक्रम के दौरान मंत्री जाधव ने औषधीय पौधों के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि सड़कों के किनारे इनके रोपण की योजना बनाई जा रही है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आयुर्वेद के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। उन्होंने राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्था औषधीय पौधों के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। साथ ही ई-चरक प्लेटफॉर्म किसानों को बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

कैंसर उपचार में आयुर्वेद की नई भूमिका

वैद्य चौधरी के अनुसार, श्रीनवग्रह आश्रम में कैंसर सहित गंभीर रोगों का उपचार विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुरूप किया जा रहा है। आयुर्वेद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर बीमारी से लड़ने में सहायक होता है, जिससे मरीजों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

वैश्विक पहचान की ओर कदम

इस पुस्तक का प्रकाशन भारत के साथ-साथ लंदन में भी किया गया है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक पहुंच रही है। चौधरी के अनुसार, ऑनलाइन सर्च में भी इस पुस्तक की बढ़ती लोकप्रियता आयुर्वेद के वैश्विक प्रभाव का संकेत है।

शोध और सेवा का संगम

श्रीनवग्रह आश्रम सेवा संस्थान उपचार, शोध और जागरूकता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय है। मंत्री जाधव ने आश्रम के कार्यों की सराहना करते हुए इसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कैंसर उपचार में साक्ष्य-आधारित शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में वैद्य हंसराज चौधरी ने अपनी अब तक प्रकाशित 10 पुस्तकों का सेट केंद्रीय मंत्री को भेंट किया। मंत्री ने इसे आयुष मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मेहकर से आए जयंत वानखेड़े सहित आयुर्वेद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भी उपस्थित रहे।

यह आयोजन आयुर्वेद के पुनर्जागरण और पारंपरिक ज्ञान के आधुनिक विज्ञान से समन्वय का प्रतीक बनकर उभरा।