6 साल पहले लगे ट्रांसफार्मर, आज तक नहीं जली एक भी बल्ब की रोशनी: बाकरा में सांसद आदर्श ग्राम का सपना अधूरा | स्मार्ट हलचल






6 साल पहले लगे ट्रांसफार्मर, आज तक नहीं जली एक भी बल्ब की रोशनी | स्मार्ट हलचल


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6 साल पहले लगे ट्रांसफार्मर, आज तक नहीं जली एक भी बल्ब की रोशनी; सांसद आदर्श ग्राम में बिजली का सपना अधूरा

जहाजपुर क्षेत्र की बाकरा ग्राम पंचायत के विकास के दावे हकीकत के अंधेरे में गुम नजर आ रहे हैं। सांसद आदर्श ग्राम के रूप में चयनित इस गांव में 24 घंटे बिजली का सपना आज भी अधूरा है। प्रशासन की अनदेखी के चलते लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीण अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

6 साल से सिर्फ शोपीस बने हैं ट्रांसफार्मर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 6 साल पहले दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत गांव में बिजली की लाइन बिछाई गई थी। योजना के तहत गांव में तीन बड़े ट्रांसफार्मर भी लगाए गए थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक एक भी दिन यहां नियमित बिजली सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। गांव में खंभे, तार और ट्रांसफार्मर तो खड़े हैं, लेकिन बिजली न होने से ये सब पूरी तरह से बेकार साबित हो रहे हैं।

बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के काम प्रभावित

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली न होने के कारण उनके रोजमर्रा के काम बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दी गई हैं, लेकिन आज तक किसी ने सुध नहीं ली।

योजना पर उठ रहे सवाल:
दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना है। इसके तहत बिजली ढांचे को मजबूत करने और निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बाकरा गांव की यह स्थिति योजना की सफलता पर बड़ा सवालिया निशान लगा रही है। लाखों का बजट खर्च होने के बाद भी योजना पूरी तरह अधूरी है।

आंदोलन की चेतावनी

बिजली विभाग और प्रशासन की इस घोर लापरवाही से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द बिजली सप्लाई शुरू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।