सांस्कृतिक प्रस्तुतियो का आयोजन,गोदावरी धाम अखाड़ा टीम का शौर्य प्रदर्शन विशेष आकर्षण
विराट धर्म सभा में संतुलित विकास का आह्वान, संस्कृति से ही राष्ट्र का उत्थान संभव : साध्वी मधु जी महाराज
कोटा। स्मार्ट हलचल|विज्ञान नगर स्थित आर्य समाज में आयोजित विराट धर्म सभा एवं हिंदू सम्मेलन में साध्वी मधु महाराज (बालिका आश्रम) ने कहा कि वास्तविक विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मनुष्य, समाज, परिवार और प्रकृति के संतुलित उत्थान से जुड़ा है। उन्होंने राष्ट्र के लिए स्व-बोध, पूर्वजों की पहचान, प्राचीन संस्कृति, भाषा और साहित्य के ज्ञान को अनिवार्य बताया।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक विष्णु ने कहा कि माता-पिता एवं सास-ससुर की सेवा करने वालों पर संकट नहीं आता। भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है, इसके लिए संस्कृति को अपनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सुशील सोनी द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। अतिथियों का स्वागत बृजमोहन पंचोली, प्यारेलाल जोशी, अनिल ठौरा, चेतन जैन, श्याम शर्मा, राजेंद्र अग्रवाल, सुरेश लखेरा, संजय त्रिपाठी, गोवर्धन लाल, रेखा लखेरा, कैलाश अग्रवाल, कैलाश सोनगरा, नेमीचंद, कमलाकांत, राकेश चड्डा, गिरिराज गुप्ता, मनोज नामा, रमेश सर्राफ एवं विनोद बाहुबली ने किया।
स्वागत भाषण में अनिल जैन ठौरा ने पारंपरिक प्रतीकों—जनेऊ, कलावा, तिलक, चोटी, चूड़ी, सिंदूर, बिछिया व साड़ी—के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित अशोक शर्मा शास्त्री ने की, जबकि डॉ. रामेश्वर अग्रवाल व डॉ. सुनील सोनी ने भी विचार रखे।
विशिष्ट उपलब्धियों के लिए डॉ. गरिमा भार्गव, रामकिशन शर्मा, डॉ. एस.एन. सिंघल, सुनील दुबे, सोनाक्षी चतुर्वेदी एवं पुरुषोत्तम शर्मा का तिलक-माला, दुपट्टा व प्रतीक-चिह्न से सम्मान किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में न्यू किड्स स्कूल की बालिकाओं का समूह नृत्य, डॉ. गरिमा भार्गव टीम व सोनाक्षी चतुर्वेदी का कथक तथा गोदावरी धाम अखाड़ा टीम का शौर्य प्रदर्शन विशेष आकर्षण रहा।
कार्यक्रम का संचालन पी.के. हरसोरा व बृजमोहन पंचोली ने किया तथा आभार कौशल रस्तोगी ने व्यक्त किया। समापन पर लगभग ढाई हजार लोगों ने सामूहिक भारत माता की आरती की व सहभोज हुआ। प्रातः आर्य समाज परिषद में रामकृष्ण वर्मा शर्मा के नेतृत्व में विश्व शांति महायज्ञ में लगभग 50 जोड़ों ने आहुतियाँ दीं, इस अवसर पर विज्ञान नगर दुल्हन की तरह सजा।

