भीलवाड़ा । सखी संस्थान द्वारा सूरजपुरा गांव में महिलाओं की बैठक आयोजित कर बाल विवाह एवं लैंगिक हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं और किशोरियों को उनके अधिकारों, सुरक्षा एवं सामाजिक कुरीतियों के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई।
बैठक की शुरुआत सखी संस्थान की प्रतिनिधि हेमलता ने संस्थान के परिचय के साथ की। उन्होंने बताया कि सखी संस्थान एक महिला-नेतृत्व वाला जमीनी संगठन है, जो महिलाओं, किशोरियों, बच्चों एवं युवाओं के सशक्तिकरण, लैंगिक समानता, बाल संरक्षण तथा सामाजिक न्याय के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। संस्थान का उद्देश्य ऐसा जागरूक और संवेदनशील समाज बनाना है, जहां प्रत्येक महिला और लड़की सम्मान, सुरक्षा और समान अवसरों के साथ जीवन जी सके।
बैठक के दौरान हेमलता ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल विवाह लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और भविष्य की संभावनाओं को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि बालिकाओं के अधिकारों और विकास पर सीधा प्रहार है। इसे रोकने के लिए परिवार, समुदाय, पंचायत, विद्यालय और प्रशासन की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम में महिलाओं एवं किशोरियों के विरुद्ध होने वाली लैंगिक हिंसा, घरेलू हिंसा, भेदभाव और सामाजिक असमानताओं पर भी चर्चा की गई। उपस्थित महिलाओं को हिंसा की पहचान करने, उसके खिलाफ आवाज उठाने तथा उपलब्ध कानूनी सहायता और सरकारी सेवाओं की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें अपने परिवार और गांव में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया गया।
बैठक के अंत में उपस्थित महिलाओं ने बाल विवाह रोकने, लैंगिक हिंसा के खिलाफ मुखर होने तथा किशोरियों की शिक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम में महिलाओं ने सामाजिक बदलाव के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का भरोसा भी दिलाया।