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बसंत पंचमी एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर ज्ञान, रंगमंच और राष्ट्रभक्ति का संगम

संचिना कला संस्थान के ‘खेल-खेल में नाटक सीखो’ अभियान ने बच्चों में भरा देशप्रेम का जोश।

शाहपुरा@(किशन वैष्णव)बसंत पंचमी के पावन अवसर पर विद्या, कला और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब संचिना कला संस्थान द्वारा ‘खेल-खेल में नाटक सीखो’ अभियान के अंतर्गत ए1 टेक्नो माइंड स्कूल में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मां सरस्वती की आराधना के साथ-साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायी रूप में मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने पूरे वातावरण को ज्ञान, साधना और सृजनात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संचिना कला संस्थान के वरिष्ठ रंगकर्मी राम प्रसाद पारीक का प्रभावशाली एकल अभिनय रहा। उन्होंने छोटे-छोटे नाट्य प्रसंगों के माध्यम से मां सरस्वती की महिमा का भावपूर्ण चित्रण किया तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के त्याग, संघर्ष और अदम्य साहस को जीवंत रूप में मंच पर उतार दिया।
‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा’ जैसे अमर नारों ने बच्चों के मन में देशप्रेम की ज्वाला प्रज्वलित कर दी।
बसंत पंचमी को ज्ञान, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के अवतरण का पर्व माना जाता है, जो वसंत ऋतु के आगमन के साथ नवचेतना और सृजनशीलता का संदेश देता है। वहीं 23 जनवरी 1897 को जन्मे नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज़ाद हिंद फौज का गठन कर स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक दिशा दी—इस ऐतिहासिक तथ्य को नाट्य माध्यम से सरल और प्रभावी ढंग से बच्चों तक पहुंचाया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य नव निधि राज सिंह राणावत ने की। अपने प्रेरक संबोधन में उन्होंने कहा कि
“नाटक और खेल जैसे सहज माध्यम बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण के साथ-साथ उन्हें देश के महान क्रांतिकारियों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।”
विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अंग्रेज़ी भाषा में नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर लेख एवं कविताएं प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया, जिसे उपस्थित अतिथियों ने सराहा।
कार्यक्रम का सफल संचालन जगदीश सिंह ने किया तथा अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
संचिना कला संस्थान का यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के बीज बोने का सशक्त प्रयास सिद्ध हुआ, जिसने बसंत पंचमी और नेताजी जयंती के संदेश को जीवंत और यादगार बना दिया।

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