विक्रम सिंह
काछोला । ककरोलया घाटी ग्राम पंचायत के चोहली गाँव में मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। दलित परिवार के तीन मासूम बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ चुका है। पिता कैलाश और माता प्रेम देवी का बीमारी के चलते निधन हो गया, जिसके बाद बच्चों के सामने भूख और बेसहारा जीवन की भयावह तस्वीर खड़ी हो गई।इन मासूमों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी अब उनकी 70 वर्षीय बीमार दादी मांगी देवी पर आ गई है, जो स्वयं अस्वस्थ रहती हैं और किसी तरह गुजारा कर रही हैं। हालात इतने बदतर हो चुके थे कि बच्चों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई।इस मार्मिक स्थिति की जानकारी जब ककरोलया घाटी के दूध कारोबारी एवं भामाशाह मनोज प्रजापत को चोहली गाँव के युवाओं ने दी, तो उनका दिल पसीज गया। उन्होंने बिना देर किए अपने निजी खर्चे से गेहूं, आटा, तेल, मसाले सहित अन्य खाद्य सामग्री की व्यवस्था की और बच्चों के घर पहुँच गए।
उस समय बुजुर्ग दादी किसी काम से दूसरे गाँव गई हुई थीं। जैसे ही भूखे बच्चों ने मनोज प्रजापत को खाद्य सामग्री लेकर आते देखा, वे फूट-फूटकर रो पड़े। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया।गाँव के बद्रीलाल शर्मा, मगनलाल शर्मा, भारत सुवालका और दिनेश वैष्णव के हाथों बच्चों को राशन सामग्री सौंपी गई। इस दौरान मनोज प्रजापत ने गाँववासियों से भी इस परिवार की हरसंभव मदद करने की अपील की, ताकि इन मासूमों को दो वक्त की रोटी और सुरक्षित भविष्य मिल सके ।


