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पिथास विद्यालय विवाद: डॉ. अंबेडकर की तस्वीर नहीं लगाने पर भीम आर्मी का कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन,सौंपा ज्ञापन

पुनित चपलोत

भीलवाड़ा । जिले के कोटड़ी तहसील के गांव पिथास स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में 26 जनवरी को आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर नहीं लगाए जाने को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। भीम आमी भारत एकता मिशन संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन कर पुलिस अधीक्षक भीलवाड़ा को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

सौंपे ज्ञापन में बताया गया कि कार्यक्रम के दौरान गांव के सांवरमल पुत्र कल्याण बैरवा सहित अन्य ग्रामीणों ने देखा कि विद्यालय में अन्य महापुरुषों की तस्वीरें तो लगी थीं, लेकिन संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर नहीं थी। इस पर ग्रामीणों ने विद्यालय के अध्यापक जितेन्द्र शर्मा से अंबेडकर की तस्वीर लगाने का आग्रह किया। अध्यापक द्वारा विद्यालय में तस्वीर उपलब्ध नहीं होने की बात कहे जाने पर ग्रामीण अपने घर से तस्वीर लेकर विद्यालय पहुंचे।

आरोप है कि जब ग्रामीण डॉ. अंबेडकर की तस्वीर अन्य महापुरुषों के साथ लगाने लगे, उसी समय गांव के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। विरोध के दौरान गाली-गलौच, धक्का-मुक्की, धमकियां देने और जातिगत अपमान करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही गांव से निकालने, राशन-पानी बंद करने और जान से मारने की धमकियों का भी उल्लेख किया गया है।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस संबंध में 26 जनवरी को ही पुलिस थाना बडलियास में लिखित रिपोर्ट दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि मामले को समझाइश के जरिए खत्म करने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि कथित रूप से पीड़ितों को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

संगठन की ओर से ज्ञापन में कहा गया है कि महापुरुषों और संविधान का अपमान राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971, बीएनएस 299, आईपीसी 504 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 का उल्लंघन है। ज्ञापन में सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी, पीड़ितों को पुलिस सुरक्षा देने और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

संगठन ने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं, ताकि आम जनता में कानून के प्रति विश्वास बना रहे और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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