दिलखुश मोटीस
सावर(अजमेर)@स्मार्ट हलचल|सावर क्षेत्र के मेहरुखुर्द स्थित प्रसिद्ध भेरुधाम लालधागे सरकार के महंत परिवार में पिछले 25 दिनों से चल रहा पारिवारिक विवाद सोमवार को ऐतिहासिक रूप से समाप्त हो गया। इस विवाद ने न केवल स्थानीय स्तर पर चर्चा पैदा की थी, बल्कि सोशल मीडिया पर भी भेरुधाम की छवि को लेकर कई भ्रामक और बढ़ा–चढ़ाकर पेश की गई पोस्टें वायरल हो रही थीं। इसके बावजूद, खास बात यह रही कि किसी भी प्रशासनिक हस्तक्षेप के बिना यह संवेदनशील मामला समाज की पहल और पारिवारिक समझदारी से शांतिपूर्वक निपट गया।
महंत के काका छोटूलाल मीणा और सत्यनारायण मीणा बीते कई दिनों से सावर तहसील कार्यालय के सामने धरने पर बैठे थे। दोनों के बीच चल रहा मनमुटाव इतना गहरा था कि मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा था। लेकिन इसी बीच गांव के बुजुर्ग, समाजजन और प्रतिष्ठित लोगों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई और भाईचारे को फिर से जोड़ने की कोशिशें शुरू कीं।
लगातार बैठकों और समझाइश के लंबे दौर के बाद आखिरकार दोनों पक्ष आपस में सहमत हुए और अपने मतभेदों को परिवार के भीतर ही सुलझाने का निर्णय लिया। समझौते के बाद छोटूलाल व सत्यनारायण मीणा ने धरना समाप्त कर दिया और शांतिपूर्वक गांव वापस लौट गए।
सबसे उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन की कोई भूमिका नहीं रही। विवाद न पूरी तरह थाना–तहसील तक पहुंचा, न किसी प्रकार की कानूनी कार्यवाही हुई—सिर्फ समाज की एकजुटता, परामर्श और आपसी संवाद ने 25 दिन पुरानी खाई को पाट दिया।
समझौते के बाद भेरुधाम परिसर, भक्तों और स्थानीय लोगों में राहत और संतोष की लहर दौड़ गई है। अब माहौल पहले से अधिक शांत, सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक दिखाई दे रहा है।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि सामाजिक एकजुटता और पारिवारिक संवाद किसी भी विवाद का सबसे बेहतर समाधान बन सकते हैं।













