जिला परिषद् की साधारण सभा की बैठक रही हंगामेदार, जनप्रतिनिधि बोले अफसर नहीं उठाते फोन

angry at officials

जिला परिषद की मीटिंग में बिजली, पानी, सार्वजनिक निर्माण विभाग को घेरा
-ः जिला परिषद की मीटिंग हॉल के बाहर सभी की जांच, अंदर बिना मास्क के
-ः विधायक कैलाश मेघवाल ने समय पर बैठक नहीं शुरू होने को लेकर अधिकारियों पर निकाला गुस्सा

स्मार्ट हलचल, पंकज पोरवाल

भीलवाड़ा। जिला परिषद् की साधारण सभा की बैठक हंगामेदार रही है। बोर्ड के गठन के 7 महिनों बाद हुई बैठक में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व विधायक कैलाश मेघवाल ने समय पर बैठक नहीं शुरू होने को लेकर अधिकारियों पर गुस्सा निकाला। जिला प्रमुख बरजी बाई भील के अध्यक्षता में कलेट्रेट मीटिंग हॉल में 11.30 बजे शुरू हुई मीटिंग की शुरुआत में सभी विधायकों, प्रधानों तथा जिला परिषद सदस्यों का साफा व शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया। बैठक में पंचायत राज विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर जनप्रतिनिधि इस बैठक के दौरान हमलावर मुंड में दिखे। खासतौर से जहाजपुर, कोटडी की कार्यशैली पर खासी नाराजगी जहाजपुर विधायक गोपीचन्द मीणा व कोटड़ी प्रधान करण सिंह ने जतायी। टेण्डर में भ्रष्टाचार के आरोपी सदन की बैठक में लगे तो हंगामा हो गया। जहाजपुर विधायक ने यहां तक बीडीओ क्षैत्र में जाकर टैण्डर जारी कर रहे है। बाद में इस मामले में जिला कलेक्टर ने हस्तक्षेप करते हुए 3 दिन में प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर कार्यवाही की चेतावनी दी। इसके साथ ही बैठक में बिजली बन्द होने की समस्या छायी रही। सदस्यों ने बिजली निगम के लाइनमैन पर पैसे लेकर ढीले तारों को सही करना, प्रायरिटी तोड़ कर कृषि कनेशन देना, अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाने जैसे गंभीर आरोप लगाए। कोटडी प्रधान करण सिंह बेलवा ने तो साफ कह दिया कि बिजली विभाग को ठेकेदार चलाते हैं। ठेकेदार विभाग की कनेक्शन में प्रायोरिटी तय करते हैं। पहले रोडवेज में कंडटर की जगह स्टेफनीकाम करती थी। अब तो बिजली निगम में भी स्टेपनी काम कर रही है। कोटडी प्रधान ने उनके क्षेत्र में प्रायरिटी तोड़कर कनेशन देने का मुद्दा भी उठाया। साथ ही वे बोले किसानों के खेत पर ट्रांसफार्मर चोरी होने पर नया ट्रांसफार्मर ले जाने पर भाड़ा भी किसान को देना पड़ता है क्यों ? साधारण सभा की बैठक में कोविड के दौरान हुई मौतों में चिकित्सा विभाग द्वारा मृतक आश्रितों को मृत्यु प्रमाण पत्र मृत्यु का कारण नहीं लिखने पर जनप्रतिनिधियों ने आपत्ती जतायी। हंगामें के बीच जिला कलेक्टर ने कहा किसी को भी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं जब उनके पास अस्पताल के दस्तावजे है जिसमें कोविड की पुष्टी हो रही हो तो इससे भी लाभ लिया जा सकता है। इस बीच पूर्व मंत्री व विधायक रामलाल जाट ने चिरजिंवी योजना में जनप्रतिनिधियों से आगे बढकर लोगों की मदद करने का सुझाव भी दिया। बैठक में जिला परिषद सदस्य, प्रधान और विभिन्न विभागों अधिकारी उपस्थित थे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व विधायक कैलाश मेघवाल ने कहा कि बैठक में समय का ध्यान रखना आवश्यक है। इसके कारण आज मैने बैठक शुरू नहीं होने पर यह बात अधिकारियों को कहीं थी। सेटेलाइट हॉस्पीटल शाहपुरा के सवाल पर मेघवाल ने कहा कि सरकार का पुरा प्रयास है कि शाहपुरा हॉस्पीटल को जिले में सबसे अच्छा बने और सारी सुविधाऐं उपलब्ध हो। अभी भी अस्पताल में 5 करोड रूपये ओर खर्च करना है। टेण्डर में भ्रष्टाचार के बारे में जहाजपुर विधायक गोपीचन्द मीणा ने कहा कि बीडीओ ने अपने चेहते ठेकदारों को लाभ दिया है और इसकी जांच में वह दोषी पाया जायेगा। वह खेत पर जाकर रूपये लेकर टेण्डर पास करता है और इसकी पहली जांच में भी अनियमितता पायी गयी और टेण्डर कैसिंल हुआ है। जिला परिषद् मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामचन्द्र बैरवा ने कहा कि हमने टेण्डर में हो रही शिकायत पर 3 दिन का नोटिस जारी किया है। जिसमें वांछित कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये है। बैठक में विधायक रामलाल जाट, गोपाल खण्डेलवाल, गायत्री त्रिवेदी, जब्बर सिंह सांखला, गोपीचन्द्र मीणा, विठ्ठलशंकर अवस्थी सहित प्रधान, जिला परिषद सद्स्य और अधिकारी मौजूद रहे।
देरी से मीटिंग शुरू होने पर नाराज हुए विधायक मेघवाल
19 माह बाद आयोजित जिला परिषद की साधारण सभा बैठक सुबह 11.00 बजे शुरू होनी थी। सभी विधायक तथा जिला प्रमुख व सदस्य सदन में आ चुके थे। लेकिन जिला कलेक्टर के नहीं आने के कारण आधा घंटा उनका इंतजार किया गया। जब 11.30 बजे तक भी मीटिंग शुरू नहीं हुई तो विधायक कैलाश मेघवाल नाराज हो गए और जिला परिषद सीईओ रामचंद्र बेरवा से बोले मीटिंग शुरु कीजिए कलेक्टर का कब तक इंतजार करेंगे। इसी बीच कलेक्टर शिवप्रसाद नकाते मीटिंग हॉल में पहुंच गए तब मेघवाल ने उनसे सवाल किया क्या टाइम हुआ कलेक्टर साहब। तब कलेक्टर नकाते ने जवाब दिया मैं तो आ गया था लेकिन सदन में कोरम पूरा नहीं हुआ। तब सदन में मौजूद कुछ मेंबर बोले 11.00 बजे हम आ गए थे। इस पर नाराजगी जताते हुए मेघवाल ने कलेक्टर से साफ कहा कि 11.00 बजे का मतलब 11.00 बजे मीटिंग शुरू हो जानी चाहिए। लोकसभा व विधानसभा भी 11.00 बजे शुरू हो जाती हैं। जिला प्रमुख 10.45 बजे से आकर बैठी हैं। सभी विधायक भी बैठे हैं भविष्य में ऐसा नहीं होना चाहिए तब कलेक्टर नकाते ने मेंबर सेक्रेट्री जिला परिषद सीईओ से ध्यान देने को कहा।
75 पेज का एजेंडा बैठक में मिलने पर जताई आपति
जिला परिषद सदस्य नंदलाल गुर्जर में बैठक में 75 पेज का एजेंडा देने पर आपति जताई। उन्होंने कहा कि इतनी मोटी किताब को 5 मिनट में तो पढ़ नहीं सकते, ऐसे में हम किसी विषय पर या बोलेंगे। उन्होंने सीईओ रामचंद्र बेरवा से साफ कहा कि अगली बार जब भी मीटिंग हो तो बैठक की सूचना के साथ ही एजेंडा भेजा जाए। इस पर सीईओ ने सहमति जताई कि अगली बार पहले ही एजेंडा भेजेंगे।
मीटिंग हॉल के बाहर सभी की जांच, अंदर बिना मास्क के
कोरोना के संक्रमण से बचाव के मद्देनजर मीटिंग हॉल के बाहर मेडिकल टीम लगाई गई। मीटिंग हॉल में प्रवेश करने से पहले सभी की थर्मल स्क्रीनिंग व हाथ सैनिटाइज कराए गए। उनका रजिस्ट्रेशन भी किया गया। वही मीटिंग हॉल में सरकार की पाबंदियों की अनदेखी देखी गई। अंदर कुछ जनप्रतिनिधि बिना मास्क के नजर आए।
परिजनों व कई अधिकारियों को नहीं मिला प्रवेश
कोरोना गाइडलाइन की पालना के कारण मीटिंग हॉल में जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों को प्रवेश नहीं दिया गया। उनके बाहर बैठने की व्यवस्था की गई। इसी तरह पानी, बिजली, शिक्षा, सार्वजनिक निर्माण विभाग के भी एक-एक अधिकारी को ही सदन में बैठने दिया। यहां तक की पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों को भी जिला परिषद सीईओ के चेंबर में भेजा गया।

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