कोरोना काल से पहले चलती थीं 2 बसें, अब समय पर बस न मिलने से कॉलेज विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित; ग्रामीणों ने उठाई अतिरिक्त फेरे शुरू करने की मांग
खेराड़/भीलवाड़ा (स्मार्ट हलचल)
भीलवाड़ा और बूंदी जिले को जोड़ने वाले खेराड़ अंचल के दर्जनों गांवों में रोडवेज बसों की भारी कमी के चलते ग्रामीणों और विद्यार्थियों को रोजाना भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। भीलवाड़ा से बूंदी वाया खेराड़ के इस लंबे और व्यस्त मार्ग पर वर्तमान में केवल एक ही रोडवेज बस का संचालन हो रहा है, जिससे यात्रियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
कोरोना काल के बाद घटा दी बसें, अब 4 बसों की दरकार
ग्रामीणों ने बताया कि कोरोना काल से पहले इस मार्ग पर राजस्थान रोडवेज की दो नियमित बसें संचालित होती थीं, लेकिन उसके बाद से परिवहन निगम द्वारा एक बस बंद कर दी गई। वर्तमान में इतने बड़े रूट पर मात्र एक ही बस चल रही है, जिसके आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं होने से यात्रियों को भारी असुविधा होती है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यात्रियों के भार को देखते हुए इस मार्ग पर कम से कम 4 रोडवेज बसों का संचालन होना चाहिए।
🛑 कॉलेज विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित, आवागमन का एकमात्र सहारा रोडवेज
खेराड़ क्षेत्र के अधिकांश छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए भीलवाड़ा और बूंदी के महाविद्यालयों पर निर्भर हैं। ग्रामीण अंचल में आवागमन का एकमात्र सुरक्षित साधन रोडवेज बसें ही हैं। बसों की कमी और समय पर संचालन न होने से छात्र-छात्राओं को रोजाना कॉलेज पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
दर्जनों गांवों की लाइफलाइन है यह रूट
भीलवाड़ा से बूंदी के बीच यह महत्वपूर्ण रूट त्रिवेणी, महुआ, मानपुरा, श्यामपुरा, माल का खेड़ा, जलिन्द्री, खींया, नीम का खेड़ा, गुड्डा नाथावत एवं रामनगर जैसे दर्जनों प्रमुख गांवों और ढाणियों को जोड़ता है। बसों की कमी से आमजन के साथ-साथ बुजुर्गों और महिलाओं को भी आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ रही है। ग्रामीणों ने परिवहन निगम से अविलंब नई बसें शुरू करने की मांग की है।
