कवि राजकुमार बादल अपनी कविता के माध्यम से प्रदेश वासियो के कोरोना महामारी को लेकर कर रहे जागरूक

कवि राजकुमार बादल अपनी कविता के माध्यम से प्रदेश वासियो के कोरोना महामारी को लेकर कर रहे जागरूक

लक्ष्मण मेघवंशी

खजूरी – कस्बे के समीप बांकरा पंचायत के होनहार राजस्थान के हास्य कवि राजकुमार बादल ने कविता के माध्यम से कोरोना से सावधानी बरतने पर संदेश दे रहे
कोरोना महामारी को लेकर केंद्र सरकार एवम राज्य सरकार सहित प्रशाशन दिन रात आमजन को जागरूक कर रहा है तथा घरों में रहने के लिए व अनावश्यक बाहर निकलने पर जुर्माना वसूल कर रहे है इसी महामारी से बचाव के लिये राष्ट्रीय कवि राजकुमार बादल राजस्थानी कविता के माध्यम से आमजन को जागरूक कर रहे है व बेमतलब घरों से बाहर निकलने पर अपने व अपनो को क्या नुकसान है और घर मे रहने के क्या फायदे है ये समजा रहे है
कविता

बेमतलब घर सूं बारे मत घूंमे मारा बीर
थारा मुरखपणा सूं कतरा नैणा ढऴसी नीर
न दीखी रेआंधां थने बरबादी की तशवीर
जीणू है तो घर में रह बारे फूटे तकदीर
जद आपां जीतांला को कोरोणू हारेगो
अब ढीला रेग्या तो लाखां ने मारेगो

दूजी लहर असर भी दूणूं होश चौगणू राखो
घर क बार काऴ खडो है बाहर मतना झांको
चौराया पर फरो अठै कांई जाज डूबरया थांका
बातां सूं समझो कोने थे भूत हुया लातांका
भूत हुया लातांका
नजरबंद हो जासी तो यमराजा हारेगो
पण ढीला रेग्या तो लाखां ने मारेगो

मूसऴधार पडे बरखा जद कुणकुण बारे घूमः
चाले लू का फटकारा जद घरमे पडिया अजूमः
जाणे टांग टूटगी तो कांई फिरता फरो रबडता
शरम करो शमसान जागरिया देखो गांव उजड़ता
देखो गांव उजड़ता
बन्द दरवाजो मूऴमन्त्र है यो ही तारेगो

कोरोणा सूं मोटी घरमै आफत जो आजावे
समझदार तो ऊं ही है के जद ही बारे जावे
दो गज दूरी मास्क जरूरी और जरूरी टीको
मरबा म हुशियार गणा जीबा का लख्खण सीखो
जीबा का लख्खण सीखो
हिम्मत राखो बिलपावर ही बगत संवारेगो

न समझ्या तो लापरवाही पड़ जावेली भारी
पोलिथीन पैक हो लाशां ठेठ मसाणे जारी
घरका छात्यां कूटो मूण्डो देख नहीं पावेला
हरिद्वार भी गऴे फूलडा दूजां काही जावेला
दूजां काही जावेला
अतरा संकट टऴग्या मालिक यो भी टाऴेगो
पण ढीला रहग्या तो लाखां न मारेगो