भीलवाड़ा । भीलवाड़ा की अनीता हिरण ने शिक्षा, शोध और आध्यात्मिक साधना के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। इस उपलब्धि के साथ अब वे ‘डॉ. अनीता हिरण’ के नाम से जानी जाएंगी। उन्होंने मेवाड़ यूनिवर्सिटी चित्तौड़ के डिपार्टमेंट ऑफ योगा, फैकल्टी ऑफ अल्टरनेट थेरेपी से ‘प्रेक्षा ध्यान एवं विपश्यना ध्यान का समीक्षात्मक अध्ययन’ विषय पर अपना शोध कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया। डॉ. अनीता हिरण पिछले एक दशक से जैन विश्व भारती लाडनूं से जुड़ी हुई हैं और वहां निरंतर अपनी सेवाएं दे रही हैं। इसी संस्थान से उन्होंने ‘साइंस ऑफ लिविंग (योगा)’ में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। उनके शैक्षणिक सफर में निरंतरता और शोध के प्रति गहरी प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अब तक वे दो राष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस और दो वेबिनार में भाग ले चुकी हैं, साथ ही उनके पांच शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने नेचुरोपैथी कोर्स में डिप्लोमा भी प्राप्त किया है, जिससे वैकल्पिक चिकित्सा और प्राकृतिक उपचार के क्षेत्र में उनकी समझ और अधिक सशक्त हुई है। वर्तमान में डॉ. हिरण अणुव्रत विश्व भारती सोसाइटी योग क्षेम वर्ष के शिविर की सह-संयोजिका के रूप में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे पूर्व वे राणावास, जयपुर और भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों पर ‘जीवन विज्ञान शिक्षक प्रशिक्षण शिविर’ में प्रशिक्षक के रूप में कार्य कर चुकी हैं और अनेक शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया है। डॉ. अनीता हिरण की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण और मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह योग, ध्यान और जीवन विज्ञान जैसे विषयों के प्रति समाज में बढ़ती जागरूकता को भी दर्शाती है। उनका यह सफर नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है और शिक्षा व साधना के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने का एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।
