पुर्व शहर विधायक अवस्थी व एएसपी जैन ने किया, आयोजन का शुभारंभ
भीलवाड़ा/शहर के सर्राफा बाजार में जीनगर समाज द्वारा मंगलवार को रंगतेरस पर वर्षों पुरानी परंपरा का आयोजन कोड़ामार होली का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया। बताया जाता है की वीरांगनाओं के बलिदान की याद में मनाया जाने वाला यह 200 साल पुराना पारंपरिक उत्सव शहर के साथ ही विभिन्न कॉलोनियों और बस्तियों के लोगों को आकर्षित करता है। इस दौरान चार कड़ाव में 15 हजार लीटर पानी और 20 किलो रंग घोला जाता है, महिलाएं कड़ाव की सुरक्षा के लिए कपड़े से बने कोड़े लेकर खड़ी रहती है और पुरुषों द्वारा डोलची से पानी फेंकने पर उन्हें कोड़े से जवाब दिया जाता है। मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ शहर के पुर्व विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारस जैन ने अपने संबोधन से किया। इस मौके बड़ी संख्या में पुलिस जाब्ता तैनात रहा। करीब बारह बजे शुरू हुआ यह आयोजन दोपहर तक बड़े उत्साह से चला। जिसमें भाभियों ने जमकर देवरों की पीठ पर कौड़े बरसाए। इस दौरान कड़ाव को कई बार पानी से भरा गया। बताया जाता है की यह आयोजन महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के साथ समुदाय में उत्साह और सहभागिता का प्रतीक बन चुका है। समाज के हर वर्ग बुजुर्ग, महिलाएं और युवा इस परंपरा में सक्रिय योगदान देते आए हैं।
रंगतेरस के पर इसलिए खेली जाती है, कोड़ामार होली
कोड़ामार होली के पीछे एक बड़ा कारण भी बताया जाता है की वर्ष 1568 में चित्तौड़गढ़ के किले पर अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया तब चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को महारानी पद्मिनी ने हजारों वीरांगनाओं के साथ जौहर किया था। दो दिन बाद तेरस के दिन क्षत्रियों ने किले व मातृभूमि की रक्षा के लिए केसरिया बाना पहनकर शाका किया, जिसे इतिहास में खून की होली के नाम से जाना जाता है। उन्हीं वीरांगनाओं के बलिदान को याद करते हुए मेवाड़ में रंग तेरस पर्व मनाया जाता है। करीब 200 सालों से कोड़ामार होली का आयोजन कर रहा है, जिसमें विशेषकर नव विवाहित जोड़े शामिल होते हैं।
बैरवा मोहल्ला से हाथों में कोड़े लेकर आती है, समाज की महिलाएं
आयोजन से पुर्व समाज की महिलाएं सुबह बैरवा मोहल्ला में एकत्र होकर ढोल की थाप पर हाथों में कपड़े से निर्मित कोड़े लेकर सामूहिक रूप से सर्राफा बाजार में कार्यक्रम स्थल के लिए निकलती है, जहां समाजजनों द्वारा हंसी-ठिठोली के साथ उनका स्वागत किया जाता है, और इसी के साथ कोड़ामार होली खेलने का रोमांचक आयोजन शुरू होता है जो दोपहर बाद तक बड़े उत्साह के साथ जारी रहता है और सांझ ढलने के साथ ही समाज के पंचायती नौहरे में सामुहिक भोज का आयोजन किया जाता है। इस बीच अन्य आयोजन भी होते हैं।

