भैरू चौधरी
कोटड़ी। भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी थाने में दर्ज एफआईआर ने अवैध गारनेट खनन के नाम पर चल रहे एक संगठित “बंदी राज” का ऐसा खुलासा किया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है—क्या खनन करने वालों से प्रति मशीन ₹30-30 हजार की मासिक वसूली का यह खेल अचानक शुरू हुआ, या लंबे समय से चलता रहा और जिम्मेदार तंत्र की नजरों से बचता रहा?
एफआईआर के अनुसार अजय पांचाल, नंदसिंह उर्फ पिन्टू सिंह, नारायण गुर्जर और कालू गुर्जर ने मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया और गारनेट का काम करने वालों को डरा-धमकाकर “बंदी” देने के लिए मजबूर किया। यह भी सामने आया कि कई लोगों से यह रकम वसूली जा चुकी है, जबकि अन्य को लगातार धमकाकर पैसे लेने के प्रयास जारी थे—यानी यह कोई एक-दो दिन का नहीं बल्कि व्यवस्थित तरीके से चल रहा नेटवर्क था।FIR में जिन लोगों से पैसे वसूले जाने का जिक्र है, उनमें शंकर लाल गुर्जर, राजू वैष्णव, चैन सिंह, सोहन जाट, धन्ना लाल गुर्जर, विजय गुर्जर, कालू गुर्जर, रामचन्द्र गुर्जर, देवकिशन गुर्जर, छोटू लाल गुर्जर सहित 15–20 अन्य लोग शामिल हैं—जो यह संकेत देता है कि यह गिरोह व्यापक स्तर पर सक्रिय था और बड़ी संख्या में लोगों को अपने जाल में ले चुका था।सबसे अहम और चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी बीट कांस्टेबल और आसूचना अधिकारी के जरिए सामने आई और मुखबिर से भी इसकी पुष्टि हुई—तो क्या यह मान लिया जाए कि सिस्टम को इसकी भनक थी? अगर हां, तो सवाल उठता है कि कोटड़ी व पारोली थानों के थाना अधिकारी, बिट प्रभारी और आसूचना तंत्र इस पूरे “बंदी राज” से पूरी तरह अनभिज्ञ थे या फिर कहीं न कहीं चूक, लापरवाही या मौन सहमति के कारण यह नेटवर्क चलता रहा?हालांकि, जैसे ही मामला जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव तक पहुंचा, उन्होंने बिना देर किए DST (स्पेशल टीम) को सक्रिय किया और त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को धर दबोचा। यह कार्रवाई यह जरूर दर्शाती है कि सख्त नेतृत्व में समय रहते माफिया तंत्र पर लगाम लगाई जा सकती है—लेकिन यह सवाल भी छोड़ जाती है कि क्या यह कार्रवाई पहले हो सकती थी?अब पूरे मामले में नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच सिर्फ इन चार नामों तक सीमित रह जाएगी या उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचेगी, जिसने गारनेट के नाम पर “बंदी राज” कायम कर रखा था? क्या कोई बड़ा चेहरा अब भी पर्दे के पीछे है, या आने वाले दिनों में और नाम सामने आएंगे?
