ब्यावर पुलिस की बड़ी सफलता: 14 माह से लापता नाबालिग दस्तयाब

14 माह का इंतजार खत्म, विशेष प्रयासों से नाबालिग सकुशल दस्तयाब

पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपी ने रची थी डिजिटल सबूत मिटाने की साजिश
डायरी में लिखकर गई थी ‘Want to Die’, पुलिस ने चुनौतीपूर्ण मामले का किया खुलासा

अनिल कुमार

ब्यावर।स्मार्ट हलचल|ब्यावर के साकेत नगर थाना क्षेत्र से करीब 14 माह पूर्व लापता हुई नाबालिग बालिका को पुलिस ने अथक प्रयासों और तकनीकी निगरानी के जरिए सकुशल दस्तयाब कर लिया है। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को डिटेन कर लिया है। प्रकरण में अनुसंधान जारी है।
पुलिस के अनुसार 2 जून 2025 को नाबालिग के परिजनों ने रिपोर्ट दी थी कि उनकी 16 वर्ष की बेटी सुबह करीब 10.45 बजे घर से बिना बताए चली गई और वापस नहीं लौटी। परिजनों द्वारा रिश्तेदारों व संभावित स्थानों पर तलाश के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला। इस पर थाना साकेत नगर में प्रकरण संख्या 248/2025 धारा 137(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया।
नोटबुक में लिखा था ‘Want to Die’
मामले की गंभीरता इस कारण और बढ़ गई थी कि घर से जाने से पूर्व नाबालिग अपनी नोटबुक में अंग्रेजी में ‘Want to Die’ लिखकर गई थी। इससे परिजनों और पुलिस के बीच उसके साथ किसी अनहोनी की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई थी। लंबे समय तक सुराग नहीं मिलने के कारण मामले को लेकर क्षेत्र में भी तनाव की स्थिति बनी रही।
नाबालिग की दस्तयाबी और आरोपी के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की मांग को लेकर कुछ समय पूर्व परिजनों, विभिन्न संगठनों एवं सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस थाने के बाहर धरना दिया था तथा उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी।
विशेष पुलिस टीम ने लगातार किया अनुसंधान
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक ब्यावर रतन सिंह के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनुकृति उज्जैनिया के मार्गदर्शन तथा वृत्ताधिकारी ब्यावर नरेन्द्र पारीक के निकट सुपरविजन में थानाधिकारी आशुतोष पाण्डे के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम गठित की गई।
पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया अकाउंट्स और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लगातार निगरानी की। राजस्थान सहित अन्य संभावित राज्यों और जिलों में कई स्थानों पर दबिश देकर सुराग जुटाए गए। साथ ही पुलिस ने परिजनों से लगातार संपर्क बनाए रखते हुए मानवीय दृष्टिकोण से उन्हें ढांढस भी बंधाया।
आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए अपनाए कई तरीके
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी कंप्यूटर, फोटोग्राफी और मोबाइल रिपेयरिंग का जानकार है। उसने नाबालिग को अपने साथ ले जाने से काफी समय पहले योजना तैयार कर ली थी। पुलिस के अनुसार आरोपी ने डिजिटल सुराग नहीं छोड़ने के लिए अपने और नाबालिग के नाम से सोशल मीडिया अकाउंट तथा डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल नहीं करने की योजना बनाई और दोस्तों से प्राप्त सिम का उपयोग किया।
घटना वाले दिन आरोपी नाबालिग को घर के बाहर से बुलाकर टैक्सी से विजयनगर ले गया। वहां से मोटरसाइकिल पर लिफ्ट लेकर टैक्सी स्टैंड पहुंचा और फिर टैक्सी से केकड़ी तथा बस के जरिए देवली पहुंचा। इसके बाद टैक्सी से कोटा और वहां से भोपाल चला गया। भोपाल में कमरा किराये पर लेकर दोनों करीब एक माह तक बाहर नहीं निकले।
इसके बाद आरोपी नाबालिग को भोपाल में छोड़कर आगरा चला गया। पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से उसने आगरा में एक पार्क के पास अपना मोबाइल जानबूझकर गिरा दिया। पुलिस टीम ने सर्विलांस के आधार पर उस मोबाइल को आगरा से बरामद किया, लेकिन आरोपी और नाबालिग का वास्तविक ठिकाना भोपाल में था।
पहचान छिपाने के लिए बदले काम
पुलिस के अनुसार भोपाल में आरोपी ने पहले पानीपुरी का ठेला लगाया, लेकिन पहचान उजागर होने की आशंका के चलते यह काम छोड़ दिया और मजदूरी करने लगा। वह नाबालिग के बालिग होने का इंतजार करता रहा।
नाबालिग के बालिग होने के बाद दोनों ने भोपाल में आर्य समाज के माध्यम से विवाह किया तथा अप्रैल माह में मध्यप्रदेश शासन से विवाह का पंजीयन भी करवाया। इसके बाद नाबालिग ने अपने परिजनों से संपर्क किया, लेकिन परिजनों ने लोकलाज के चलते पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी। बाद में परिजनों और आरोपी ने वकील से संपर्क कर अजमेर आने की योजना बनाई।
अजमेर पहुंचते ही पुलिस ने ट्रेस की लोकेशन
पुलिस टीम इस दौरान तकनीकी सर्विलांस की लगातार मॉनिटरिंग करने के साथ मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय रखे हुए थी। आरोपी के अजमेर आने की सूचना और लोकेशन ट्रेस होते ही पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई कर नाबालिग को सकुशल दस्तयाब कर लिया तथा आरोपी गोरधन उर्फ साहिल शर्मा (करीब 40 वर्ष), निवासी सेदड़ा रोड, राजमहल होटल के पीछे, ब्यावर, हाल किरायेदार कृष्णा कॉलोनी, मेवाड़ी गेट बाहर, ब्यावर को डिटेन कर लिया।
पुलिस द्वारा आरोपी से पूछताछ की जा रही है तथा प्रकरण में आगे की कानूनी कार्रवाई और अनुसंधान जारी है। पुलिस की इस कार्रवाई से 14 माह से अपनी बेटी की तलाश कर रहे परिजनों को बड़ी राहत मिली है।