यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है बल्कि समाज में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी सामने लाती है
– प्रशासन की चुप्पी पर फूटा सेन समाज का गुस्सा-टोंक जिला सेन समाज ने प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
शिवराज बारवाल मीना
टोंक । स्मार्ट हलचल|बीकानेर जिले के वज्जू थाना क्षेत्र अंतर्गत रंजीतपुरा गांव में 13 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की हृदयविदारक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। आठवीं कक्षा की छात्रा बीते दिनों 21 फरवरी को परीक्षा देने घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। बाद में उसका शव रोही क्षेत्र में अर्धनग्न अवस्था में मिला। घटना के चार दिन बीत जाने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सेन समाज उत्थान समिति टोंक ने प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर के जरिए ज्ञापन भेजते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
*चार दिन से धरना-फिर भी कार्रवाई शून्य*
सेन समाज के टोंक जिलाध्यक्ष रवि प्रकाश सेन के नेतृत्व में समाज के लोगों ने मंगलवार को टोंक शहर में घंटाघर होते हुए कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकाली गई और मीटिंग के बाद जमकर विरोध प्रदर्शन किया गया। हालांकि इस दौरान कलेक्ट परिसर में कोतवाली थाने का पुलिस जाप्ता तैनात रहा। उसके पश्चात सेन समाज ने प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर टोंक को हत्यारों की गिरफ्तारी के साथ ही सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग का ज्ञापन सौंपा और बताया कि राज्यभर में लोग लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।
*सेन समाज का कहना है कि :*
* अब तक मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई।
* पुलिस ने ठोस प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की।
* पीड़ित परिवार को समुचित सुरक्षा व आश्वासन नहीं दिया गया।
* समाज का आरोप है कि यदि यही तत्परता किसी प्रभावशाली परिवार के मामले में दिखाई जाती, तो अब तक गिरफ्तारी हो चुकी होती।
*सेन समाज की पांच प्रमुख मांगें*
* ज्ञापन में प्रशासन के सामने स्पष्ट और कड़े शब्दों में पांच मांगें रखी गई हैं—
1. सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी।
2. फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर दोषियों को फांसी की सजा।
3. पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी व डेयरी बूथ आवंटन।
4. मुख्यमंत्री राहत कोष से 1 करोड़ रूपये का मुआवजा तत्काल जारी किया जाए।
5. भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए पुलिस व्यवस्था को सख्त और जवाबदेह बनाया जाए।
प्रशासन की जवाबदेही तय हो
इतनी गंभीर घटना के बाद भी अगर चार दिन में गिरफ्तारी नहीं होती, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी। सवाल उठता है —
* क्या पुलिस के पास पर्याप्त सुराग नहीं हैं?
* क्या जांच में ढिलाई बरती जा रही है?
* आखिर किसके दबाव में कार्रवाई रुकी हुई है?
* यदि समय रहते आरोपियों को नहीं पकड़ा गया, तो यह संदेश जाएगा कि बेटियों की सुरक्षा केवल भाषणों तक सीमित है।
* प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
सेन समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगें शीघ्र नहीं मानी गईं तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा। जिलों में धरना-प्रदर्शन और सड़क जाम की रणनीति बनाई जा रही है।
समाज का कहना है— “जब तक बेटी को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन थमेगा नहीं।”
अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागेगा? बेटी के साथ हुई दरिंदगी ने इंसानियत को शर्मसार किया है। अगर अब भी सख्त और त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो यह केवल एक परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज के विश्वास का हनन होगा।
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यह घटना बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। राजस्थान के बीकानेर जिले के रणजीतपुरा इलाके में 13 वर्षीय छात्रा, जो परीक्षा देने घर से निकली थी, उसके साथ दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने आरोपी श्यामसुंदर को गिरफ्तार कर लिया है। उसने अपराध स्वीकार भी किया है। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश था और विरोध प्रदर्शन हुए। आरोपी ने शक से बचने के लिए खुद को न्याय की मांग करने वाले धरनों में भी शामिल किया, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों और एक लॉकेट के आधार पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
इस मामले ने पूरे प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर गुस्सा पैदा किया है। राजस्थान विधानसभा में भी विपक्ष ने इस पर जोरदार विरोध दर्ज कराया और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है बल्कि समाज में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता भी सामने लाती है।










