मंगरोप।मुकेश खटीक।आमलीगढ़ पाछली ग्राम पंचायत क्षेत्र के खातीखेड़ा गांव में बिना अनुमति खातेदारी भूमि से बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है।जमीन की सफाई के नाम पर करीब 10 साल पुराने 49 पेड़ काट दिए गए।इनमें 35 खेजड़ी,8 देशी बबूल,3 शीशम,2 छल्लर और 3 पलाश(खाखरा)के पेड़ शामिल हैं।मामले की जानकारी मिलने पर राजस्व विभाग हरकत में आया और मौके पर पहुंचकर कटे हुए पेड़ों को जब्त कर एसडीएम कार्यालय में प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।हमीरगढ़ तहसीलदार भंवरलाल सेन ने बताया कि आमलीगढ़ पाछली ग्राम पंचायत के खातीखेड़ा गांव स्थित खातेदारी भूमि संख्या 3366,रकबा 0.9990 हेक्टेयर राजस्व रिकॉर्ड में मैसर्स अजय एक्सप्लो के नाम दर्ज है।यह भूमि मूल रूप से शिवचरण पुत्र बालचंद हेडा,निवासी सरवाड़(जिला अजमेर),हाल भीलवाड़ा के नाम खातेदारी में थी।हाल ही में उक्त भूमि को मंगरोप निवासी इमरान पुत्र बशीर मोहम्मद ने क्रय किया है।तहसीलदार के अनुसार शुक्रवार को भूमि की सफाई करवाने के दौरान ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा वर्षों पहले सघन पौधारोपण अभियान के तहत लगाए गए करीब 10 वर्ष पुराने पेड़ों पर जेसीबी चला दी गई जिसमें 35 खेजड़ी,8 देशी बबूल,3 शीशम,2 छल्लर तथा 3 पलाश(खाखरा)सहित कुल 49 पेड़ काट दिए गए।राष्ट्रीय पेड़ो को काटने की जानकारी मिलने के बाद मौके पर बड़ी संख्या में खातीखेड़ा गांव के ग्रामीण पहुंचे।उन्होंने पेड़ो की कटाई का विरोध करते हुए उक्त पेड़ो की कटाई करने वाले दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।इसकी सूचना मिलते ही तहसीलदार भंवरलाल सेन ने आमलीगढ़ पाछली के भू-अभिलेख अधिकारी चंद्रप्रकाश प्रजापत को मौके पर भेजा।उन्होंने घटनास्थल का मौका निरीक्षण कर मौका पर्चा तैयार किया तथा कटे हुए सभी पेड़ों को जब्ती में लिया।इसके साथ ही भूमि खातेदार से हस्ताक्षर करवाकर पेड़ों को किसी भी प्रकार से खुर्द-बुर्द नहीं करने के लिए पाबंद किया गया।तहसीलदार सेन ने बताया कि कटे हुए सभी पेड़ों को राजस्व विभाग की ओर से जब्त कर शनिवार सुबह एसडीएम कार्यालय में प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।मामले की जांच के बाद नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
खेजड़ी की कटाई पर सख्त हैं नियम
राजस्थान में खातेदारी भूमि पर भी कई प्रकार के पेड़ों की कटाई के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक मानी जाती है।विशेष रूप से खेजड़ी के पेड़ पर्यावरणीय दृष्टि से संरक्षित श्रेणी में माने जाते हैं।हाल ही में राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि खेजड़ी के पेड़ों की कटाई बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के नहीं की जानी चाहिए।ऐसे मामलों में राजस्व नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
