मुकेश खटीक
मंगरोप।ग्राम पंचायत मंगरोप में सरकारी भूमि के आवंटन में कथित अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पंचायत प्रशासन ने हमीरगढ़ रोड स्थित पुराने पंचायत कार्यालय के पीछे लगभग 4000 वर्ग फीट बेशकीमती सरकारी भूमि बिना किसी नीलामी प्रक्रिया के ही बेच दी,जिससे पंचायत को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है।ग्रामीणों के अनुसार उक्त भूमि को‘अपनी बचत घर योजना एवं महिला सहकारी समिति’के नाम पर मात्र औपचारिक कागजी कार्यवाही पूरी कर रियायती दर पर आवंटित कर दिया गया।ग्रामीणों का कहना है कि पूरा मामला इतनी गोपनीयता से किया गया कि गांव में किसी को इसकी जानकारी तक नहीं लग पाई।ग्रामीणों ने यह भी बताया कि महिला सहकारी समिति को पूर्व में ही बड़लियास रोड स्थित कब्रिस्तान के पास राज्य सरकार द्वारा गोदाम निर्माण हेतु पर्याप्त भूमि आवंटित की जा चुकी थी।इसके बावजूद दूसरी सरकारी भूमि को दोबारा समिति को बेचना नियमों के विरुद्ध है।बताया जा रहा है कि जिस जमीन का विक्रय किया गया,उस पर जलदाय विभाग के पुराने क्वार्टर बने हुए थे,जिनमें विभागीय उपकरण रखे जाते थे।विभाग का कार्य ठेके पर जाने के बाद इन क्वार्टरों का उपयोग कम हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले इन क्वार्टरों को धीरे-धीरे खुर्द–बुर्द किया गया और बाद में भूमि को चुपचाप बेच दिया गया।ग्राम पंचायत अधिनियम के प्रावधानों में स्पष्ट उल्लेख है कि पंचायत स्वामित्व वाली किसी भी भूमि को बेचने से पूर्व सार्वजनिक नीलामी अनिवार्य है,ताकि पारदर्शिता रहे और पंचायत को अधिकतम राजस्व मिले।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मंगरोप पंचायत ने इन नियमों को नजरअंदाज करते हुए चहेतों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है।ग्रामीणों ने एक माह पूर्व इस मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से की थी।शिकायत के बाद जिला मजिस्ट्रेट न्यायलय ने विवादित भूमि पर चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रोकने के निर्देश जारी किए थे।लेकिन ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य अभी भी पूरी तरह नहीं रुका है,जिससे लोगों में रोष है।स्थानीय लोगों ने बताया कि पंचायत क्षेत्र में सरकारी जमीन की कमी पहले से ही बनी हुई है।उदाहरण के तौर पर पीएचसी को सीएचसी में अपग्रेड करने की प्रक्रिया चल रही है,लेकिन भूमि अभाव के कारण यह सम्भव नहीं हो पा रहा है।ऐसे में उपलब्ध सरकारी जमीन बेच देना विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि पिछले कई सालों से पंचायत क्षेत्र में भूमि आवंटन में अनियमितताएँ लगातार सामने आती रही हैं,जिनकी उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।ग्राम विकास अधिकारी विनोद सोनी ने बताया कि भूमि को‘अपनी बचत घर योजना एवं महिला सहकारी समिति’ को पंचायत नियमों के अनुसार रियायती दर पर बेचा गया है तथा सभी दस्तावेज पंचायत कार्यालय में सुरक्षित हैं।ग्रामीणों ने यह भी प्रश्न उठाया कि वर्तमान में पंचायत में प्रशासक नियुक्त है,क्योंकि सरपंच का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। ऐसे में प्रशासक द्वारा वार्ड पंचों व स्थानीय लोगों को बिना सूचना दिए भूखंड आवंटन कैसे जारी है? ग्रामीणों के अनुसार प्रशासक एकतरफा निर्णय नहीं ले सकता।ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी,जिला प्रशासन व राज्य सरकार से इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।उनका कहना है कि ऐसा न होने पर भविष्य में भी सरकारी भूमि के दुरुपयोग की पुनरावृत्ति हो सकती है।













