कोटा।स्मार्ट हलचल| राजस्थान राज्य बजट 2026-27 में उच्च शिक्षा और जनजातीय अध्ययन को नई दिशा देते हुए कोटा विश्वविद्यालय में “भगवान बिरसा मुंडा शोधपीठ” की स्थापना की घोषणा की गई है। कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. बी.पी. सारस्वत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह शोधपीठ आदिवासी महानायक बिरसा मुंडा के जीवन, दर्शन, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के गहन अध्ययन का केंद्र बनेगी। इससे हाड़ौती अंचल सहित पूरे प्रदेश में जनजातीय शोध को संस्थागत मजबूती मिलेगी।
कोटा विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) सारस्वत ने बजट प्रावधानों का स्वागत करते हुए कहा कि 1000 युवाओं को अंग्रेजी, जापानी और कोरियन भाषाओं में प्रशिक्षण, प्रत्येक जिले में इंडस्ट्री पार्टनर के साथ सेंटर की स्थापना तथा 30 करोड़ रुपये की लागत से नए टेक्नो हब और एआई लैब की स्थापना भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप कौशल निर्माण का संकेत है। यह पहल युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार से जोड़ने में सहायक होगी।प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार के तहत नए राजकीय महाविद्यालयों एवं नए विषयों की स्वीकृति प्रदान की गई है।नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की तर्ज पर राज्य में नई परीक्षा एजेंसी की स्थापना की घोषणा की गई है, जिसे पेपर लीक जैसी समस्याओं पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
मानवता, स्वास्थ्य और समावेशी विकास का ऐतिहासिक बजट: राजेश कृष्ण बिरला
कोटा। कोटा नागरिक सहकारी बैंक एवं रेडक्रॉस सोसायटी के स्टेट चेयरमैन राजेश कृष्ण बिरला ने राज्य सरकार के बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे आत्मनिर्भर, सशक्त और वैश्विक नेतृत्वकर्ता राजस्थान की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा प्रस्तुत यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रदेश के हर वर्ग के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।
उन्होंने विशेष रूप से असहाय, विमंदित और लावारिस रोगियों को बिना दस्तावेज के ‘मुख्यमंत्री चिकित्सा आरोग्य योजना’ एवं ‘निरोगी राज्य योजना’ के तहत निःशुल्क उपचार की सुविधा को मानवीय दृष्टिकोण से क्रांतिकारी निर्णय बताया। साथ ही ‘राज सुरक्षा’ योजना के माध्यम से एक्सीडेंट पीड़ितों को बिना कागजी प्रक्रिया के मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना आमजन के जीवन की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
किसानों के लिए ₹25,000 करोड़ के ब्याजमुक्त ऋण, गेहूं पर ₹150 प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस तथा राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी डेवलपमेंट फंड को ₹1,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ किए जाने को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी बताया गया।
कोटा के औद्योगिक व व्यापारिक विकास को गति देगा बजट:
कोटा। करेजियस कमेटी फाउडेशन के अध्यक्ष एवं डीसीएम के पूर्व सीईओ वी के जेटली ने राज्य बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस बार के बजट में कोटा को औद्योगिक एवं व्यापारिक हब के रूप में विकसित करने की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि ‘सिंगल विंडो–वन स्टॉप शॉप’ के तहत ऑनलाइन अनुमतियों की संख्या 149 तक बढ़ाने से कोटा में नए उद्योगों की स्थापना आसान होगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा। कोटा में प्रस्तावित टॉय पार्क की स्थापना से स्थानीय उद्यमियों और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे, वहीं डीएमआईसी के अंतर्गत विकसित होने वाले औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक ढांचे का लाभ भी कोटा को मिलेगा।
कृषि और डेयरी क्षेत्र को मजबूती देने वाला बजट,‘सरस’ उत्पादों के आउटलेट अन्य राज्यों में खोलना स्वागत योग्य
कोटा। कोटा-बूंदी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ एवं भूमि विकास बैंक के अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ ने राजस्थान सरकार के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट का स्वागत करते हुए इसे किसान, पशुपालक और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक एवं दूरदर्शी बजट बताया है।
उन्होंने राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी डेवलपमेंट फंड की राशि ₹1,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ किए जाने के निर्णय को दुग्ध उत्पादकों के हित में ऐतिहासिक कदम बताया। साथ ही ‘सरस’ उत्पादों के आउटलेट अन्य राज्यों में खोले जाने से विपणन के नए अवसर सृजित होंगे।
उन्होंने कहा कि ₹25,000 करोड़ के ब्याजमुक्त अल्पकालीन ऋण का लक्ष्य तय किया जाना प्रदेश के लगभग 35 लाख किसानों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। इससे खेती की लागत घटेगी और किसानों को साहूकारी से मुक्ति मिलेगी। 5 लाख किसानों को उन्नत किस्म के दलहनी और तिलहनी बीजों का निःशुल्क वितरण आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। आवारा पशुओं से फसल सुरक्षा के लिए 20,000 किलोमीटर तारबंदी पर ₹228 करोड़ की सब्सिडी को भी उन्होंने किसानों के लिए बड़ी राहत बताया।
