नगर निकाय चुनाव में भाजपा का दबदबा, कांग्रेस ने भी जमाया दम
भीलवाड़ा निगम के 70 वार्डों में भाजपा 45 पर काबिज, कांग्रेस को 10 वार्ड; पालिकाओं में कहीं भाजपा तो कहीं कांग्रेस का पलड़ा भारी
भीलवाड़ा, स्मार्ट हलचल। नगर निकाय आम चुनाव-2026 के नतीजों ने जिले की स्थानीय राजनीति की नई तस्वीर सामने रख दी है। सोमवार को हुई मतगणना के बाद जिले के नगर निगम भीलवाड़ा सहित 10 नगरपालिकाओं के सभी परिणाम घोषित कर दिए गए। नतीजों में सबसे बड़ा सियासी संदेश नगर निगम भीलवाड़ा से सामने आया, जहां भाजपा ने 70 में से 45 वार्ड जीतकर स्पष्ट बढ़त बनाई। कांग्रेस महज 10 वार्डों तक सिमट गई, जबकि 15 वार्डों में निर्दलीयों ने जीत दर्ज कर दोनों प्रमुख दलों के सामने चुनौती खड़ी कर दी।
जिले की नगरपालिकाओं के परिणाम देखें तो तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। कई निकायों में भाजपा ने अपना प्रभाव कायम रखा तो गंगापुर और शाहपुरा में कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए भाजपा को पीछे छोड़ दिया। वहीं कई जगह निर्दलीय प्रत्याशियों ने दोनों दलों के समीकरणों को झटका दिया है। ऐसे में चुनाव परिणाम केवल जीत-हार नहीं, बल्कि आगामी स्थानीय राजनीति के लिए नए शक्ति-संतुलन के संकेत भी दे रहे हैं।
नगर निगम में भाजपा की बड़ी छलांग, कांग्रेस पिछड़ी
भीलवाड़ा नगर निगम के 70 वार्डों के परिणाम भाजपा के पक्ष में सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश लेकर आए। भाजपा के 45 प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि कांग्रेस को सिर्फ 10 सीटों से संतोष करना पड़ा। वहीं 15 निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की।
नगर निगम में भाजपा की यह बढ़त उसे बोर्ड की राजनीति में मजबूत स्थिति में ले जाती दिखाई दे रही है। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए 10 वार्डों का आंकड़ा आत्ममंथन का विषय है। निर्दलीयों की बड़ी संख्या ने यह भी संकेत दिया है कि स्थानीय स्तर पर कई वार्डों में मतदाताओं ने दलों से अलग जाकर उम्मीदवारों को तरजीह दी।
भीलवाड़ा नगर निगम का परिणाम
| दल | जीती सीटें |
|---|---|
| भाजपा | 45 |
| कांग्रेस | 10 |
| निर्दलीय | 15 |
पालिकाओं में अलग-अलग रंग दिखा जनादेश
जिले की नगरपालिकाओं के परिणामों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए अलग-अलग संदेश दिए हैं।
| नगरपालिका | कुल वार्ड | भाजपा | कांग्रेस | निर्दलीय | अन्य |
|---|---|---|---|---|---|
| आसींद | 25 | 12 | 8 | 5 | — |
| बनेड़ा | 20 | 10 | 9 | 1 | — |
| बीगोद | 25 | 12 | 6 | 7 | — |
| बिजौलिया | 25 | 12 | 11 | 2 | — |
| गंगापुर | 25 | 9 | 14 | 2 | — |
| गुलाबपुरा | 35 | 14 | 10 | 10 | RLP – 1 |
| हमीरगढ़ | 20 | 8 | 7 | 5 | — |
| जहाजपुर | 25 | 15 | 3 | 7 | — |
| मांडलगढ़ | 20 | 11 | 2 | 7 | — |
| शाहपुरा | 35 | 8 | 22 | 5 | — |
गंगापुर में कांग्रेस का पलड़ा भारी
गंगापुर नगरपालिका के परिणाम भाजपा के लिए झटका और कांग्रेस के लिए राहत लेकर आए। यहां 25 वार्डों में कांग्रेस ने 14 सीटों पर जीत दर्ज कर बढ़त बनाई, जबकि भाजपा को 9 सीटें मिलीं। दो वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए।
गंगापुर का जनादेश जिले की उस राजनीतिक तस्वीर को रेखांकित करता है, जिसमें स्थानीय स्तर पर कांग्रेस अभी भी अपनी जमीन बनाए हुए है।
गुलाबपुरा में त्रिकोणीय समीकरण
गुलाबपुरा नगरपालिका के 35 वार्डों में भाजपा ने 14, कांग्रेस ने 10 और निर्दलीयों ने 10 सीटें जीतीं। वहीं आरएलपी ने एक वार्ड में जीत दर्ज की।
यहां किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत जैसा राजनीतिक संदेश नहीं मिला। निर्दलीयों की मजबूत मौजूदगी आगे बोर्ड गठन की राजनीति को महत्वपूर्ण बना सकती है।
हमीरगढ़ में भाजपा आगे, कांग्रेस पीछे
हमीरगढ़ के 20 वार्डों में भाजपा के 8, कांग्रेस के 7 और निर्दलीयों के 5 प्रत्याशी विजयी रहे। यहां भी दोनों प्रमुख दलों के बीच अंतर बहुत बड़ा नहीं रहा और निर्दलीयों की भूमिका अहम बन गई।
जहाजपुर और मांडलगढ़ में भाजपा का दबदबा
जहाजपुर में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 25 में से 15 वार्डों पर कब्जा जमाया। कांग्रेस को सिर्फ 3 सीटें मिलीं, जबकि 7 निर्दलीय विजयी रहे।
इसी तरह मांडलगढ़ के 20 वार्डों में भाजपा ने 11 सीटें जीतकर बढ़त बनाई। कांग्रेस के खाते में सिर्फ 2 सीटें आईं, जबकि 7 निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की।
इन दोनों निकायों के परिणाम भाजपा के लिए खासे उत्साहजनक रहे, जबकि कांग्रेस के लिए यहां का प्रदर्शन संगठनात्मक स्तर पर बड़े सवाल खड़े करता है।
शाहपुरा में कांग्रेस की बड़ी वापसी
शाहपुरा नगरपालिका का परिणाम कांग्रेस के लिए जिले की सबसे बड़ी राहत में से एक रहा। 35 वार्डों में कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा महज 8 वार्डों तक सीमित रही। निर्दलीयों ने 5 वार्ड अपने नाम किए।
शाहपुरा का जनादेश बताता है कि जिले की स्थानीय राजनीति में भाजपा का प्रभाव हर निकाय में समान नहीं है और कुछ क्षेत्रों में कांग्रेस ने अपनी मजबूत पकड़ कायम रखी है।
पूरे जिले का राजनीतिक संदेश क्या?
इन परिणामों को एक साथ देखें तो नगर निगम भीलवाड़ा में भाजपा की मजबूत पकड़ साफ दिखाई देती है। वहीं नगरपालिका स्तर पर तस्वीर मिश्रित है। आसींद, बनेड़ा, बीगोद, बिजौलिया, जहाजपुर और मांडलगढ़ में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि गंगापुर और शाहपुरा में कांग्रेस ने दमदार वापसी का संकेत दिया।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन रहा। कई निकायों में निर्दलीयों ने इतनी सीटें जीती हैं कि बोर्ड गठन के समय उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है। ऐसे में चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब सियासी गतिविधियों का अगला चरण शुरू होना तय माना जा रहा है।
नगर निकाय चुनाव ने यह भी साफ कर दिया है कि स्थानीय राजनीति में पार्टी के साथ-साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय समीकरण, वार्ड स्तर का संगठन और बागी प्रत्याशियों का प्रभाव निर्णायक भूमिका निभाता है।
प्रशासन ने शांतिपूर्ण ढंग से कराई मतगणना
नगर निकाय आम चुनाव-2026 के तहत सोमवार को सभी निकायों में मतगणना शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष रूप से संपन्न हुई। नगर निगम भीलवाड़ा के वार्ड सदस्य पदों की मतगणना जिला मुख्यालय स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय, तिलक नगर में हुई, जबकि 10 नगरपालिकाओं की मतगणना संबंधित पालिका मुख्यालयों पर कराई गई।
जिला निर्वाचन अधिकारी जसमीत सिंह संधू के निर्देश पर मतगणना स्थलों पर सुरक्षा, प्रवेश-निकास, कार्मिकों की सुविधाओं और कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए। अधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश की निगरानी की गई तथा राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित की गई।
चुनाव पर्यवेक्षक ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा
चुनाव पर्यवेक्षक अरविंद सारस्वत ने मतगणना केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने मतगणना कक्षों की व्यवस्थाओं, सुरक्षा इंतजामों और निर्वाचन प्रक्रिया का जायजा लेते हुए अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने मतगणना को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के निर्देश दिए।
अब नजर बोर्ड गठन और सियासी जोड़तोड़ पर
नतीजे घोषित होने के साथ चुनावी मुकाबला भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन स्थानीय सत्ता की असली राजनीतिक बाजी अब बोर्ड गठन के दौरान देखने को मिलेगी। जहां निर्दलीयों की संख्या अधिक है, वहां उनकी भूमिका अचानक बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर ऐसे वार्डों पर रहेगी, जहां निर्दलीय पार्षद सत्ता के समीकरण का रुख बदल सकते हैं।
यानी मतपेटियां खुल चुकी हैं, आंकड़े सामने आ चुके हैं—अब निगाहें बोर्ड की कुर्सी पर हैं।
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