शिव लाल जांगिड़
Black marketing of urea at the village service cooperative society
सरकारी दर 266.50 के स्थान पर 400 में बिक रहा खाद, किसानों ने जताई नाराजगी
जीएसएस में किसानों से खुली लूटः 266 का यूरिया 400 में थमाया, व्यवस्थापक ने स्वीकारी ‘टैगिंग’ की मजबूरी, जबरन सल्फर और माइक्रो राजा थोपा
लेकिन धरातल पर हकीकत यह है कि किसानों को आज भी यूरिया के साथ जबरन ‘सल्फर’ और अन्य उत्पाद (टैगिंग) थोपे जा रहे हैं।
लाडपुरा ग्राम सेवा सहकारी समिति में यूरिया की कालाबाजारी, किसान आक्रोशित
किसानों ने बताया कि 266.50 के कट्टे के साथ 134 का ‘माइक्रो राजा’ जबरन जोड़कर 400 लिए जा रहे हैं।
लाडपुरा /स्मार्ट हलचल। ग्राम सेवा सहकारी समिति लाडपुरा में किसानों के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा है। समिति में यूरिया खाद की अधिक वसूली और मनमानी बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा तय -दरों से कहीं अधिक मूल्य वसूला जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों ने बताई परेशानी, समिति में यूरिया का 45 किलो का कट्टा जिसकी सरकारी कीमत 266.50 तय है, उसे 400 में बेचा जा रहा है। ऐसे में समिति की यह मनमानी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। कई किसान तो अधिक दाम सुनकर खाली हाथ वापस लौट रहे हैं। खेतों में बढ़ती खाद की जरूरत, फसलों में इस समय यूरिया खाद की मांग रहती है। किसानों का कहना है कि उन्हें आवश्यक खाद समय पर और सरकारी दरों पर नहीं मिल पा रहा। समिति कर्मचारियों द्वारा किसानों को जबरन सल्फर खाद भी दिए जाने की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को राहत देने के लिए सस्ते दरों पर खाद उपलब्ध करवाती है, लेकिन समिति स्तर पर चल रही कालाबाजारी उस उद्देश्य को विफल कर रही है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। ऊपर से बिल देने से भी इनकार कर दिया जा रहा है, बहाना बना रहे हैं कि मशीन खराब है और प्रिंट नहीं निकल रहा। किसानों ने चिंता जताई कि खेतों में समय पर खाद न मिलने से फसल प्रभावित हो रही है। समिति व्यवस्थापक कैलाश चंद्र तेली ने स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया है कि सहकारी समिति को सल्फर खाद और टैगिंग उत्पाद लेने पर ही खाद दिया जा रहा है। इसलिए मजबूरी है। गणित लूट का, 266.50 का माल 400 में किसानों ने बताया कि 45 किलो यूरिया कट्टे की सरकारी दर 266.50 रुपये है। लेकिन समिति कर्मचारी इसके साथ जबरदस्ती सल्फर या अन्य उत्पाद जोड़कर 400 रुपये वसूल रहे हैं। जब किसान इसका पक्का बिल मांगते हैं, तो उन्हें टाल दिया जाता है। जो किसान अतिरिक्त सामान लेने से मना करता है, उसे खाद नहीं है। सरकारी सब्सिडी का लाभ किसानों को देने के बजाय समिति इसे अपनी कमाई का जरिया बना रही है। लेकिन धरातल पर हकीकत यह है कि किसानों को आज भी यूरिया के साथ जबरन ‘सल्फर’ और अन्य उत्पाद (टैगिंग) थोपे जा रहे हैं। किसानों ने बताया कि 266.50 के कट्टे के साथ 134 का ‘माइक्रो राजा’ जबरन जोड़कर 400 लिए जा रहे हैं।


