ओम जैन
शंभूपुरा। शंभूपुरा स्थित आदित्य सीमेंट प्लांट में शुक्रवार को एक कार्मिक की मौत के बाद जहां शुक्रवार देर रात तक ग्रामीण और परिजन जिला अस्पताल में धरने पर बैठकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते दिखे वही रात 12 तक भी आदित्य सीमेंट से किसी भी अधिकारी द्वारा परिजनों से मुलाकात नहीं करने पर सभी बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन आदित्य सीमेंट प्लांट शंभूपुरा के फैक्ट्री गेट पर पहुंचे और धरने पर बैठ गए सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन इकट्ठे हो गए और फैक्ट्री गेट के बाहर गेट बंद कर प्रदर्शन किया और लापरवाह अधिकारियों, प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उन पर कार्यवाही करने एवं मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और परिवार में से किसी को नौकरी देने की मांग की।
दिन भर चली वार्ता, मण्डल महामंत्री ने करवाया समझौता
परिजन और ग्रामीणों का एक प्रतिनिधि मंडल एवं आदित्य सीमेंट प्लांट के अधिकारी और प्रशासन के अधिकारी एव जनप्रतिनिधि भाजपा मण्डल महामंत्री रामप्रसाद जाट, राजू सुखवाल, रमेश सुथार की उपस्थिति में समझौते को लेकर वार्ता की गई जो की सुबह से शुरू हुई जो शाम 4 बजे तक चली। मण्डल महामंत्री रामप्रसाद ने बताया कि लंबी वार्ता के बाद जब बात नही बनी तो एचआर हेड नितेश राठी आये जिनसे परिजनों और ग्रामीणों की ओर से हमने मांग रखी जिस पर राठी ने सहमति जताते हुए तुरन्त 20 लाख रुपया मुआवजा और परिवार में से एक व्यक्ति को नौकरी देने की सहमति दे दी, जिसके बाद यह लम्बी वार्ता इस समझौते के बाद धरना प्रदर्शन तुरन्त समाप्त हो गया।
मैनेजमेंट के खिलाफ मामला दर्ज
मृतक के भाई गोपाल सुथार ने शंभूपुरा थाने में एक रिपोर्ट थी जिसमें बताया कि उसके भाई को ऐसा करने के लिए दुष्प्रेरित किया गया, उस पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था साथ ही घटनास्थल पर हमें नहीं जाने दिया बाहर ही रोक लिया और मैनेजमेंट ने अपनी लापरवाही छुपाते हुए खुद ही फंदे से नीचे उतार उसे जिला अस्पताल पहुंचा दिया और वहां भी छोड़कर तुरन्त चले गए इसके बाद कोई मिलने तक नहीं आए फंदे से लटकी हुई भाई नरेंद्र का फोटो वीडियो देखने पर भी वह आत्महत्या नहीं लग रही क्योंकि उसके पैर पूरी तरह से जमीन पर ही टिके हुए थे जो की आत्महत्या होना प्रतीत नहीं होता है यह यह हत्या या और कोई मामला भी हो सकता है जो की पूरी तरह से संदिग्ध लग रहा है जिसको लेकर लापरवाह मैनेजमेंट और सीएसओ मानविजय सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवा कानूनी कार्रवाई की मांग की।
शंभूपुरा थानाधिकारी धर्मराज मीणा ने बताया कि मृतक नरेंद्र पिता ओमप्रकाश निवासी कन्नौज के भाई गोपाल सुथार ने मैनेजमेंट और सीएसओ मानविजय सिंह के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दी जिस पर मामला दर्ज कर जांच शुरू करते हैं, वहीं धरना प्रदर्शन की समाप्ति के बाद शव का पोस्टमार्टम करवा परिजनों को सुपुर्द किया गया।
फैक्ट्री गेट के बाहर लगा रहा भारी जाप्ता
घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन और नारेबाजी करते हुए आदित्य सीमेंट फैक्ट्री गेट पहुंचे उससे पूर्व ही गेट के बाहर भारी संख्या में पुलिस जाप्ता तैनात रहा। इस दौरान भदेसर डिप्टी विनोद लखारा, शंभूपुरा थानाधिकारी धर्मराज मीणा मय जाप्ता एवं पुलिस लाइन और भदेसर एवं निंबाहेड़ा थाने से भी जाप्ता तैनात रहा।
सवालों के घेरे में आदित्य सीमेंट की सुरक्षा
इस पूरे मामले में एक प्रमुख बात निकलकर सामने आई की जहां हजारों श्रमिक काम कर रहे हैं और इतना बड़ा प्लांट जिसमें इतनी टाइट सिक्योरिटी होने के बावजूद प्लांट के अंदर इस तरह की घटना होना संदिग्ध ही नहीं सुरक्षा को भी सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर रही हैं। यहां जिम्मेदारों की लापरवाही या फिर लापरवाह मैनेजमेंट जो भी कहें अतिशयोक्ति नहीं होगी।
यूनियन नेता पीड़ितों के बजाय प्रबंधन के आगे पीछे घूमते दिखा
शंभूपुरा आदित्य सीमेंट का यूनियन अध्यक्ष वैसे तो मजदूरों के लिए होता है लेकिन वह सिर्फ कहने के लिए मजदूरों का अध्यक्ष होकर रह गया जो कि इतने बड़े मामले में भी मजदूर ओर उसके परिवार का साथ देने और उनके सपोर्ट में खड़े होने की बजाय शुक्रवार रात से ही मैनेजमेंट के लिए काम करता हुआ दिखा एवं अधिकारियों के आगे पीछे घूमता दिखा जिससे वहां मौजूद लोगों ने भी उसकी इस हरकत पर नाराजगी जताई यही नहीं वहां मौजूद आदित्य सीमेंट के कार्मीको में से ही कुछ लोगों ने मीडिया को बताया कि यह यूनियन अध्यक्ष शैतान सिंह आदित्य सीमेंट तो रोज आता है लेकिन सिर्फ पंचिंग कर 10 मिनट में ही वापस अपनी गाड़ी में बैठकर रवाना हो जाता है, जिससे यह कई सालों से ऐसे ही आदित्य सीमेंट से मुफ्त कि तनख्वाह उठा रहा है, इसलिए यह ऐसे ही किसी भी मामले में मजदूरों के लिए नहीं बल्कि आदित्य सीमेंट के लिए काम करता है एवं वहाँ मौजूद लोगों ने बताया कि अगर हम आवाज उठाते हैं तो इस यूनिट अध्यक्ष द्वारा हमारी आवाज दबा दी जाती है और नौकरी से निकालने की धमकियां देता है, इस पूरे मामले में मैनेजमेंट के साथ साथ ग्रामीणों ओर मजदूरों का यूनियन अध्यक्ष के खिलाफ भी गुस्सा साफ साफ नजर आया।













