‘भ्रष्टाचार की बू’ का आरोप, सुनाई खरी-खोटी, सेवा पुस्तिका व नियमितीकरण पर उठे सवाल
शिक्षा विभाग में व्यवस्थाओं पर बड़ा प्रश्नचिन्ह, सैकड़ों शिक्षकों की मौजूदगी से गरमाया माहौल
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी
शहर के शिक्षा जगत में गुरुवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के मातृ संगठन आरएसएस की विचारधारा से जुड़े अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालयी शिक्षा) के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने एकजुट होकर मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) कार्यालय का जोरदार घेराव कर दिया। जिला अध्यक्ष महेश कुमार शर्मा के नेतृत्व में पहुंचे शिक्षकों ने न केवल अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की, बल्कि सीबीईओ गीता माहेश्वरी के खिलाफ जमकर नाराजगी भी जाहिर की। घेराव के दौरान माहौल पूरी तरह गर्म नजर आया। शिक्षकों के तेवर इतने तीखे थे कि जिला अध्यक्ष शर्मा ने सीबीईओ को लेकर खुलकर नाराजगी जताते हुए खरी-खोटी तक सुना डाली। शिक्षकों का आरोप था कि विभागीय उदासीनता के चलते लंबे समय से उनकी जायज मांगें अटकी हुई हैं, जिससे उनमें गहरा आक्रोश पनप रहा है।
खंड अध्यक्ष अमर सिंह चौहान ने स्थिति को विस्तार से रखते हुए बताया कि पीईईओ क्षेत्रों के कार्मिकों का स्थायीकरण हुए छह माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक उनका वेतन नियमित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति शिक्षकों के साथ अन्याय के समान है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है। इतना ही नहीं, सेवानिवृत्त होने वाले कार्मिकों के पेंशन प्रकरणों को भी अनावश्यक रूप से कार्यालय में रोके रखने का आरोप लगाया गया। चौहान ने तीखे शब्दों में कहा कि “इन प्रकरणों को लटकाने से साफ तौर पर भ्रष्टाचार की बू आती है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। शिक्षकों ने पंचायत शिक्षकों और संविदा कार्मिकों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि तीन-तीन साल बीत जाने के बावजूद उनकी सेवा पुस्तिकाएं तैयार नहीं की गई हैं। इतना ही नहीं, वर्ष में एक बार भी सेवा पुस्तिका नहीं दिखाने से पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस लापरवाही से कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें वेतन नियमितीकरण, पेंशन प्रकरणों का त्वरित निस्तारण, सेवा पुस्तिका निर्माण और पारदर्शिता सुनिश्चित करने जैसी मांगें प्रमुख रूप से शामिल थीं। इस मौके पर संगठन के जिला कोषाध्यक्ष मुकेश कुमावत, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत चौधरी, जिला महिला मंत्री चन्दा सुवालका, जिला मीडिया प्रभारी हनुमान प्रसाद शर्मा, नयन बुला, सभाध्यक्ष मोहन लाल कोली, नवरत्नमल बगड़िया, शांति धाबाई, पंकज सोनगरा, मुकेश प्रजापत, सीताराम चौधरी सहित सैकड़ों शिक्षक और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में अपनी मांगों को दोहराते हुए जल्द समाधान की मांग की। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच सीबीईओ गीता माहेश्वरी का पक्ष सामने नहीं आ सका। पत्रकारों ने कार्यालय पहुंचकर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, लेकिन उनके मौजूद नहीं होने के कारण संपर्क नहीं हो पाया। ऐसे में अब सभी की नजरें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर शिक्षकों की इन ज्वलंत समस्याओं का समाधान कब तक होता है।
